बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं.
नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?
नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे.
नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा.
प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है.
नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं.