BPCL Profit: 28 फरवरी 2026 से जब से अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई है तो क्रूड ऑयल के रेट में जबरदस्त तेजी देखी गई. इसका असर दुनियाभर के कई देशों पर देखा गया और वहां पेट्रोल-डीजल के रेट में जबरदस्त तेजी आई. भारत सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को घटा दिया. युद्ध के दो महीने से भी ज्यादा गुजरने के बाद तेल कंपनियों ने तेल की कीमत में चार बार में 7 रुपये लीटर का इजाफा किया. सीजफायर लागू हुआ तो क्रूड ऑयल के दाम गिरकर 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ गए. आम आदमी की तरफ से पेट्रोल-डीजल को सस्ता करने की मांग की जाने लगी.
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर हुआ समझौता टूट गया और यूएस ने ईरान पर मिसाइल अटैक शुरू कर दिये. इसके बाद क्रूड ऑयल के दाम में फिर से तेजी देखी जा रही है और यह चढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. पिछले दिनों पेट्रोल महंगा होने और क्रू्ड के दाम गिरने के बावजूद सरकारी पेट्रोल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) भारी नुकसान वाली साबित हुई.
कंपनी को क्यों हुआ हजारों करोड़ का नुकसान?
तिमाही नतीजों में हुए बड़े उलटफेर का कारण तेल की कीमत पर लगा सरकारी नियंत्रण रहा. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले किये जाने के बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई से कच्चे तेल के दाम 50% से ज्यादा उछल गए. इसके बावजूद बीपीसीएल, इंडियन ऑयल और एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने ढाई महीने तक पेट्रोल-डीजल के दाम में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की. मई की शुरुआत में दाम में 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया.
मार्जिन में गिरावट, LPG सिलेंडर पर भी नुकसान
रिफाइनिंग से मिलने वाले प्रॉफिट के बावजूद मार्केटिंग मार्जिन में आई गिरावट ने बीपीसीएल (BPCL) की कमर तोड़ दी. बाजार के जानकारों के अनुसार इस तिमाही में पेट्रोल पर औसत मार्केटिंग मार्जिन माइनस 10.6 रुपये प्रति लीटर का रहा और डीजल पर माइनस 18.4 रुपये प्रति लीटर का रहा. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि कंपनी को खुदरा बिक्री पर लागत से काफी कम कमाई हो रही थी. इसी तरह एलपीजी सिलेंडर के 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में किया गया इजाफा भी काफी कम रहा.
LPG अंडर-रिकवरी और कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बीपीसीएल (BPCL) को एलपीजी बिक्री पर 3,485 करोड़ रुपये का अंडर रिकवरी नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि, सरकार से मिले 1,898 करोड़ रुपये की मदद ने कंपनी के रेवेन्यू को कुछ संभाला. बीपीसीएल का ऑपरेशनल रेवेन्यू 23% से ज्यादा बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह पिछले साल की इसी अवधि में 1.35 लाख करोड़ रुपये था. लेकिन कच्चे माल की लागत में 68.7% का उछाल आने से कंपनी का कुल खर्च 36% बढ़कर 1.66 लाख करोड़ के पार चला गया.
मांग में नरमी से रिफाइनिंग में आई गिरावट
कीमत के दबाव के साथ इस तिमाही में देश के अंदर ईंधन की डिमांड भी सुस्त रही. दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल भारत में अप्रैल में ईंधन की खपत 4.6%, मई में 6.5% और जून में 3.1% घटी. इसका असर बीपीसीएल के ऑपरेशन पर भी दिखा, जहां कंपनी की कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट बिक्री घटकर 13.62 मिलियन टन रह गई, यह पिछले साल 13.86 मिलियन टन थी. इसके अलावा कंपनी की रिफाइनरियों ने इस दौरान 10.15 मिलियन टन कच्चे तेल को प्रोसेस किया.