ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के ऐलान से उपजे तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के दो दिन दौरे पर रवाना हो गए हैं. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत न केवल अमेरिका के साथ व्यापारिक तनातनी झेल रहा है बल्कि इंडो-पैसिफिक रीजन में स्ट्रेटेजिक बैलेंस साधने की भी कोशिश कर रहा है. इस दौरे की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह पीएम मोदी का पिछले सात सालों में जापान का पहला स्टैंडअलोन दौरा है.
प्रधानमंत्री मोदी 29 अगस्त को टोक्यो पहुंचेंगे जहां वे अपने जापानी काउंटरपार्ट शिगेरु इशिबा के साथ 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे. इस दौरान रक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, क्वाड ग्रुपिंग, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से लेकर सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी. साथ ही जापान द्वारा भारत में अगले दशक में 68 बिलियन डॉलर (करीब 10 ट्रिलियन येन) निवेश की घोषणा इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण बनने वाली है.
क्वाड पर होगा बड़ा फोकस
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि मोदी-इशिबा मुलाकात में क्वाड समूह (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका) पर विशेष चर्चा होगी. हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने के कारण क्वाड की एकजुटता पर सवाल उठे हैं. ऐसे में यह बैठक क्वाड को मजबूती देने और इंडो-पैसिफिक रीजन में शांति व स्थिरता सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. क्वाड के तहत स्वास्थ्य, उभरती टेक्नोलॉजीज, सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी. मोदी और इशिबा से उम्मीद है कि वे ज्वाइंट प्रोजेक्ट और न्यू कोऑपरेशन फ्रेमवर्क पर सहमति जताएंगे.
रक्षा संबंधों को नई उड़ान
भारत-जापान रक्षा संबंध हाल के वर्षों में मजबूत हुए हैं और अब इन्हें एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी है. दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच शिप मेंटेनेंस सहयोग पर बातचीत जारी है. साथ ही, भारत का DRDO और जापान की ATLA (Acquisition, Technology and Logistics Agency) के बीच रक्षा उपकरण और तकनीक साझा करने की दिशा में चर्चाएं चल रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी के दौरे के दौरान 2008 की सुरक्षा सहयोग घोषणा पत्र (Declaration on Security Cooperation) को अपग्रेड करने पर भी सहमति बन सकती है. गौरतलब है कि हाल ही में दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के लिए यूनिकॉर्न मस्त (एडवांस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम) के संयुक्त विकास का करार किया था.
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और व्यापारिक रिश्ते
मोदी इस दौरे में टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री और सेंडाई स्थित तोहोकू शिंकानसेन प्लांट का भी दौरा करेंगे, जहां बुलेट ट्रेन के कोच बनाए जाते हैं. उम्मीद है कि भारत-जापान के बीच मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए जापान के E10 बुलेट ट्रेन पर अहम चर्चा होगी. यह ट्रेन न केवल 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, बल्कि इसमें एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम भी होंगे जो भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान दुर्घटनाओं को रोकेंगे. खास बात यह है कि इसमें भविष्य में ड्राइवरलेस ऑपरेशन की भी सुविधा होगी. जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 88,000 करोड़ रुपये की फंडिंग करेगी, जो कुल लागत (1.08 लाख करोड़ रुपये) का 81% है. शेष राशि केंद्र सरकार और महाराष्ट्र-गुजरात सरकारें मिलकर देंगी.
सेमीकंडक्टर और AI सहयोग
मोदी-इशिबा वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण जापान द्वारा अगले दशक में भारत में 68 बिलियन डॉलर निवेश की घोषणा होगी. यह निवेश आठ प्रमुख सेक्टर्स- मोबिलिटी, मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य सेक्टर में किया जाएगा. निकी एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, जापान भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण और चिप से जुड़ी टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश करेगा. भारत सरकार पहले से ही घरेलू स्तर पर चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में जापान का सहयोग भारत के टेक सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. दोनों देश एक AI कोऑपरेशन इनिशिएटिव शुरू करने की तैयारी में हैं, जिससे स्टार्टअप्स और उभरते टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. इसके तहत जापान भारतीय विशेषज्ञों को रोजगार देगा. फिलहाल करीब 25,000 भारतीय विशेषज्ञ जापान में पढ़ाई, ट्रेनिंग और वर्कफोर्स का हिस्सा बन चुके हैं.
क्यों अहम है यह दौरा?
मोदी का यह दौरा सिर्फ भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाई देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक रणनीतिक मायने हैं. अमेरिका-भारत व्यापारिक तनाव के बीच जापान भारत के लिए एक विश्वसनीय तकनीकी और व्यापारिक सहयोगी के रूप में उभर रहा है. साथ ही, इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन के बढ़ते दबदबे को देखते हुए भारत-जापान की पार्टनरशिप क्वाड को नई ताकत देने में सहायक होगी. जापान की ओर से होने वाला 68 बिलियन डॉलर का निवेश भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़े अवसर लेकर आएगा, खासकर सेमीकंडक्टर और AI जैसे क्षेत्रों में जहां भारत भविष्य की ग्लोबल अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है.
आगे की राह
जापान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी चीन के तियानजिन शहर जाएंगे जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. वहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी होने की संभावना है. स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में पीएम मोदी का यह एशियाई दौरा न केवल भारत की कूटनीतिक छवि को मजबूत करेगा बल्कि टेक्नोलॉजी, रक्षा और व्यापारिक सहयोग के नए द्वार भी खोलेगा.
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