लोहा गरम है मार दो हथौड़ा… म्यूचुअल फंड बेचने का सही समय, होंगे मालामाल!

म्यूचुअल फंड एक कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम है, जिसमें आप अपनी छोटी-छोटी बचत से एक बड़ा इन्वेस्ट कर सकते हैं. इस पर धीरे-धीरे ही सही अब काफी लोग भरोसा करने लगे हैं. इसका सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट पैसा लगाने से लेकर निकालने तक का आसान प्रोसेस है. ऑफिस ब्रेक से लेकर कैफे तक कहां निवेश करें, कौन-सा फंड अच्छा है, फंड मैनेजर कौन है? जैसे सवाल अक्सर चर्चा में रहते हैं.

लेकिन फंड के बेचने के बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. ऐसे में जो सवाल अक्सर पीछे छूट जाता है, वो है म्यूचुअल फंड कब बेचना चाहिए? इंवेस्टमेंट का फैसला जितना ज्यादा आसान होता है, उतना ही कंफ्यूजन फंड बेचने के समय होता है. कई लोग फंड को मार्केट के डाउन होने और रिटर्न में लगातार गिरावट को देखकर डर में इसे बेच देते हैं, तो कुछ लालच के चलते गलत समय पर जो कई बार घाटे का सौदा भी साबित हो जाता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड से बाहर कब और कैसे निकलें.

म्यूचुअल फंड कब बेचना चाहिए?

– अगर आपने किसी खास मकसद के लिए निवेश किया था और वह रकम मिल गई है, तो फंड को बेचकर पैसा सुरक्षित जगह पर लगाना सही माना जाता है.

– इक्विटी फंड में निवेश लंबी अवधि (कम से कम 5 साल) के लिए करना चाहिए. अगर आपकी रिटायरमेंट या जरूरत पास में है, तो इक्विटी से धीरे-धीरे निकलकर डेट या हाइब्रिड फंड में शिफ्ट होने में समझदारी है.

– मान लीजिए आपने 60% इक्विटी और 40% डेट में निवेश किया था, लेकिन कुछ समय बाद इक्विटी का हिस्सा 75% हो गया. अब जोखिम ज्यादा है. ऐसे में कुछ मुनाफा निकालकर पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करना समझदारी होगी.

– अगर आपका फंड पिछले 2–3 सालों से अपने बेंचमार्क या कैटेगरी से कमजोर रिटर्न दे रहा है, तो बाहर निकलना सही रहेगा. खासकर जब फंड मैनेजर या उसकी रणनीति में बदलाव हुआ हो.

– कभी-कभी मेडिकल इमरजेंसी, घर खरीदने जैसे मौके पर पैसा निकालना जरूरी हो जाता है. ऐसे में फंड बेचना सही कदम हो सकता है, बस नुकसान से बचने की कोशिश करें.

फंड बेचने का प्रोसेस

– आपने रेगुलर प्लान में निवेश किया है या डायरेक्ट प्लान, इन्वेस्टमेंट टाइप को समझें.
– ऑनलाइन निवेश करने पर आप उस ऐप/वेबसाइट (जैसे Groww, Zerodha, AMC साइट) में लॉगिन करें.
– यदि आपने ऑफलाइन निवेश किया है तो इस केस में आपको रिडेंपशन फॉर्म भरकर जमा करना होगा.
– तय करें कि आप पूरा पैसा निकालना चाहते हैं या आंशिक रूप से.
– म्यूचुअल फंड KYC में रजिस्टर्ड बैंक में ही पैसा आएगा, ऐसे में यदि आपने बैंक बदला है तो इसे अपडेट करना जरूरी है.
– अब रिडीम बटन दबाकर या फार्म जमा कर रिक्वेस्ट पूरी करें.

इन बातों का ध्यान रखना जरूरी

1- अगर आप दोपहर 3 बजे से पहले सेलिंग रिक्वेस्ट करते हैं, तो उसी दिन की नेट एसेट वैल्यू (NAV) मिलेगी. उसके बाद देने पर अगले दिन की NAV लागू होगी.

2- फंड को सेल करने पर मिलने वाली रकम आपको फंड के टाइप के आधार पर अकाउंट में क्रेडिट होती है. ऐसे में इक्विटी फंड बेचने पर 2–3 दिन और डेट या लिक्विड फंड के मामले में 1 दिन में पैसा मिलता है.

3- फंड को 1 साल से पहले बेचने पर 15% टैक्स (STCG) देना होगा. वहीं, यदि आप इंवेस्टमेंट के 1 साल बाद फंड को सेल करते हैं तो ₹1 लाख तक मुनाफा टैक्स फ्री, उसके बाद 10% (LTCG) टैक्स लगेगा. इसके अलावा एग्जिट लोड होने पर 0.5%-1% तक कटौती हो सकती है.

4- ELSS फंड 3 साल के अनिवार्य लॉकिंग पीरियड के साथ आता है. यानी कि इसे आप 3 साल के पहले नहीं बेच सकते हैं.