India EU Trade Deal: भारत पर टैरिफ लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्तीय बोझ बढ़ाने की कोशिश की. भारत के कारोबार, उसके निर्यात को प्रभावित किया. अमेरिका ने ट्रेड डील की बातचीत को बीच में रोककर रूसी तेल का बहाना बनाते हुए भारत पर 50 फीसदी टैरिफ का बोझ लाद दिया. अमेरिका ने भले ही ट्रेड डील से दूरी बना दी हो, लेकिन भारत अब एक ऐसे डील के करीब पहुंच गया है, जिसके होने से अमेरिका की जरूरत की खत्म हो जाएगा. अगर भारत की ये फ्री ट्रेड डील पूरी हो जाती है अमेरिका टैरिफ की भरपाई हो जाएगी.
बड़े ट्रेड डील के करीब पहुंचा भारत
भारत और यूरोपीय संघ (EU) जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता करने वाले हैं. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बड़ी ट्रेड डील होने वाली है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर दोनों के बीच बातचीत अगले दौर में पहुंच गई है. अगर ये FTA पर भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच समझौता हो जाता है तो भारत के लिए 135 अरब डॉलर का व्यापार वो भी बिना टैरिफ या टैक्स के शुरू हो जाएगा. यानी अमेरिका टैरिफ की वजह से होने वाले नुकसान की न केवल भरपाई हो जाएगी बल्कि अमेरिका पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत काफी तेजी से आगे बढ़ रही है. अगले महीने दोनों पक्षों के बीच मुलाकात होगी. इस डील पर मुहर लगते ही भारत के पास करीब 2 दर्जन देशों के साथ बिना टैक्स के व्यापार का रास्ता खुल जाएगा. GST बनेगा हथियार, अब ट्रंप देखेंगे ‘डेड इकॉनमी’ की रफ्तार, PM मोदी के ₹48000 करोड़ के तोहफे से क्या-क्या बदलेगा?
भारत को इस फ्री ट्रेड डील से क्या मिलेगा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अगले महीने दो दौर की महत्वपूर्ण बातचीत होगी. दोनों पक्षों के बीच इस डील से जुड़े मसलों को सुलझाने की कोशिश हो रही है. बाजार पहुंच और वाइन और डेयरी उत्पादों पर शुल्क के क्षेत्रों में मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच इस साल के अंत तक सभी मसलों को सुलझाकर डील साइन हो जाएगी. अगर भारत और यूरोपीय संघ के बीच अब तक के कारोबार का आंकड़ा देखें तो वित्तवर्ष 2023-24 में दोनों के बीच 135 अरब डॉलर द्विपक्षीय व्यापार हुआ है.
भारत की डील पर चीन और अमेरिका की नजर
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच इस डील पर चीन और अमेरिकी की टकटकी नजर बनी हुई है. अगर ये डील पक्की हो जाती है तो भारत को बड़ा मुनाफा होने वाला है. वहीं अमेरिका और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम होगी. इस डील से दोनों के बीच व्यापार करना और आसान हो जाएगा, बता दें कि यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. ईयू के 27 सदस्य देशों के साथ भारत के लिए कारोबार आसान हो जाएगा. अमेरिका टैरिफ की वजह से निर्यात में होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाएगी. ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाकर न केवल भारत बल्कि दुनियाभर के देशों को अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रेरित कर दिया. भारत और ईयू के बीच ये फ्री ट्रेड डील ऐसे वक्त में हो रही है, जब अमेरिका टैरिफ का हंटर चला रहा है तो चीन वैश्विक व्यापार में अपनी मनमानी कर कभी सप्लाई रोकने की धमकी देता है तो कभी नियम लागू करता है. इस डील से भारत और ईयू दोनों की चीन पर निर्भरता कम हो जाएगी. दोनों एक दूसरे के लिए मजबूत विकल्प बनकर उभरेंगे. इस डील से ग्लोबल सप्लाई चेन में विविधता आएगी और चीन और अमेरिका की मनमानी पर लगाम लगेगा.