Venezuela-India Trade: 3-4 जनवरी की रात अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर बड़ा हमला किया. इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी फोर्स ने वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अपने कब्जे में ले लिया. इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप लाइव देख रहे थे. उन्होंने इसकी जानकारी अपने ट्रुथ सोशल पर दी और कहा कि हम तब तक वेनेजुएला का शासन संभालेंगे जब तक कि सुरक्षित और समझदारी भरा सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता. ट्रंप की इस बड़ी कार्रवाई के बाद दुनिया में सबसे अधिक तेल के भंडार वाले वेनेजुएला पर अब अमेरिकी नियंत्रण की बात कही जा रही है. अमेरिका के द्वारा वेनेजुएला पर और खासकर के उसके तेल क्षेत्र पर कंट्रोल होने से भारत को बड़ा फायदा हो सकता है. जी हां, जानकार संभावना जताते हैं कि अमेरिका के इस कदम से भारत को लाभ हो सकता है और प्रतिबंध के कारण भारत के वेनेजुएला में अटकी करीब 9000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के बकाए का पेमेंट हो सकता है. यह प्रतिबंध करीब 5 साल से लगे हुए हैं. आइए जानते हैं पूरी खबर.
भारत-वेनेजुएला तेल व्यापार
यहां हम बात भारत-वेनेजुएला के तेल ट्रेड की कर रहे हैं. भारत-वेनेजुएला व्यापार खासकर के ऊर्जा क्षेत्र में तेल को लेकर अधिक रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में भारत करीब 2.54 लाख बैरल तेल प्रतिदिन (कुल निर्यात का करीब आधा हिस्सा) आयात कर रहा था. लेकिन यह पहले से काफी कम हो गया था. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 तक भारत की रिफाइनरी कंपनियां वेनेजुएला से करीब 4 लाख बैरल से अधिक प्रतिदिन कच्चे तेक की आयात करती थीं. लेकिन, अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इस सप्लाई पर काफी बड़ा असर पड़ा था और एक समय आते-आते यह सप्लाई बंद हो गई थी. इस प्रतिबंध की वजह से भारतीय तेल कंपनियों के द्वारा वेनेजुएला में किए गए करोड़ों के निवेश का भुगतान भी अटक गया.
ONGC विदेश लिमिटेड बुरी तरह से प्रभावित
ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) भारत के तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है. इसका उदे्श्य भारत के बाहर तेल और गैस की खोज, विकास और प्रोडक्शन (E&P) करना है. यह अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस में भारत की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी है. इसका करीब 15 देशों में तेल और गैस की संपत्तियां है. वेनेजुएला के पूर्वी हिस्से में स्थित सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में OVL की 40 फीसदी हिस्सेदारी है. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस कंपनी पर काफी प्रभाव पड़ा और ड्रिलिंग रिग, उपकरण के साथ जरूरी सेवाएं बंद हो गईं. इस कारण इसका उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ. इसका निवेश भी फंस गया.
9001 करोड़ रुपये का अटका भुगतान
इस क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि वेनेजुएला में OVL की हालात काफी खराब हो गई है और वहां की सरकार के द्वारा इसका करीब 1 अरब डॉलर यानी 9001 करोड़ रुपये भुगतान नहीं किया गया है. दरअसल, साल 2014 तक OVL को वेनेजुएला के द्वारा डिविडेंड के रूप में 53.6 करोड़ डॉलर का भुगतान करना था, जो नहीं किया गया. 2014 के बाद भी करीब इतना ही रुपया बकाया रह गया है. बताया जाता है कि वेनेजुएला की सरकार ने उस समय के ऑडिट को मंजूरी ही नहीं दी थी, जिस कारण पैसा अटक गया. जानकार बताते हैं कि यह बकाया कुल मिलाकर 1 अरब डॉलर यानी 9001 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है.
मिल सकता है अटका हुआ पैसा
अब वेनेजुएला में स्थिति कुछ और हो गई है. कारण साफ है क्योंकि अमेरिका ने वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को सिर्फ राष्ट्रपति पद से हटाया ही नहीं है बल्कि उन्हें वेनेजुएला की राजधानी काराकास से उठाकर अमेरिका भी ला दिया है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका में मादुरो पर आपराधिक मामले चलेंगे. लेकिन इस दौरान वेनेजुएला में अमेरिका का कंट्रोल हो रहा है. अगर वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिका पूरे तरीके से कंट्रोल कर लेता है तो वहां पर लगे प्रतिबंध फिर से हट सकते हैं. इतना ही नहीं इससे पहले की तरह फिर से कच्चे तेल की ड्रिलिंग और सप्लाई शुरू हो सकती है. विदेशी साझेदार फिर से काम शुरू कर सकते हैं. प्रतिबंध हटने या फिर इसमें ढील मिलने से भारतीय कंपनी OVL को भी राहत मिलने की उम्मीद है.जानकार बताते हैं कि कंपनी ड्रिलिंग रिग को फिर से शुरू कर सकती है. इससे सैन क्रिस्टोबल में तेल का उत्पादन फिर से शुरू हो सकता है. उम्मीद की जा रही है कि निर्यात शुरू होने से OVL को तेल राजस्व से अपने बकाया भुकतान में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसमें लंबा समय लग सकता है.
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
वेनेजुएला में नेचुरल रिसोर्सेज का बड़ा भंडार है. यहां दुनिया का सबसे अधिक कच्चा तेल मिलता है. इसके अलावा इस देश में सोना, कोयला, बॉक्साइट और लोहा समेत अन्य खनिज भी पाए जाते हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का बड़ा भंडार है. यह दुनिया के कुल तेल भंडार का पांचवा हिस्सा है. वेनेजुएला के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र यानी मराकाइबो क्षेत्र और ओरिनोको बेल्ट में सबसे अधिक मात्रा में तेल पाया जाता है. इनमें से भी ओरिनोको बेल्ट में सबसे अधिक तेल भंडार है, जो करीब 55 हजार वर्ग किमी में फैला हुआ है. वेनेजुएला का तेल अधिक सल्फर वाला होता है, जो डीजल बनाने के लिए सबसे जरूरी होता है.
भारत-वेनेजुएला व्यापार
भारतीय एंबेसी के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.175 बिलियन डॉलर का रहा है. भारत, वेनेजुएला से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है. तेल के अलावा भारत, वेनेजुएला से लोहा, स्टील, तांबा समेत अन्य चीजें आयात करता रहा है. वहीं, वेनेजुएला, भारत से सूती धागे और कपड़े, दवाएं, जैविक रसायन आदि की खरीदारी करता रहा है.
बेडरूम से मादुरो को उठा ले गई अमेरिकी सेना
मालूम हो कि शनिवार (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े 11 बजे) को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में बड़े हमले किए. इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया. इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप लाइव देख रहे थे. उन्होंने खुद इसकी जानकारी अपने ट्रुथ सोशल पर दी और कहा कि हम तब तक वेनेजुएला का शासन संभालेंगे जब तक कि सुरक्षित और समझदारी भरा सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता. ट्रंप ने कहा था – मादुरो और उनकी पत्नी को न्यू यॉर्क लाया गया है, जहां उनपर आपराधिक मामला चलाया जाएगा. स्टील के दरवाजों को चंद सेकेंड में तोड़कर मादुरो के बेडरूम में घुसते अमेरिकी सेना को मैंने पहली बार लाइव देखा. वहीं, अमेरिकी कार्रवाई पर वेनेजुएला सरकार का कहना है कि अमेरिका तेल संसाधनों पर कब्जा चाहता है. बता दें कि अमेरिका को काफी दिनों से मादुरो की तलाश थी, उनपर 2020 में न्यूयार्क में नार्को आतंकी का भी आरोप लगा था. निकोलस लंबे समय से ट्रंप के निशाने पर थे और उनपर ड्रग्स कार्टेल चलाने समेत कई और आरोप लगे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार के प्रशासन ने निकोलस से जुड़ी जानकारी देने पर 5 करोड़ डॉलर का इनाम भी रखा था. नहीं होगी पैसों की कमी!