Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY): प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 2015 में मोदी सरकार ने की थी, जिसका मकसद छोटे कारोबारियों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और मिडिल क्लास कारोबारियों को बिना गारंटी के लोन उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यह योजना देश के ‘नए मिडिल क्लास’ को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
तीन कैटेगरीज में लोन उपलब्ध
योजना के तहत लोन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है—
– शिशु (Shishu): ₹50,000 तक का लोन, छोटे व्यवसाय की शुरुआत के लिए।
– किशोर (Kishor): ₹50,000 से ₹5 लाख तक का लोन, विस्तार के लिए।
– तरुण (Tarun): ₹5 लाख से ₹10 लाख तक का लोन, बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने के लिए।
– तरुण प्लस (Tarun Plus) – नई कैटेगरी, लोन सीमा: ₹10 लाख – ₹20 लाख
नई राहत और बढ़ी हुई सीमा
बता दें कि हाल ही में मोदी सरकार ने इस योजना में अहम बदलाव किया है। पहले से लोन ले चुके योग्य उधारकर्ताओं के लिए सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख तक कर दी गई है। इसका सीधा फायदा उन छोटे कारोबारियों को मिलेगा जो पहले ही सफलतापूर्वक अपना लोन चुका चुके हैं और अब बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहते हैं। सरकार का दावा है कि मुद्रा लोन योजना ने पिछले कुछ वर्षों में 13.5 करोड़ लोगों को गरीबी से निकालकर नए मिडिल क्लास में शामिल किया है। छोटे उद्योग और स्थानीय स्तर पर स्वरोज़गार को बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ब्याज दर एक जैसी फिक्स नहीं होती, बल्कि यह बैंक और आपके लोन प्रोफाइल पर निर्भर करती है।
आवेदन प्रक्रिया और शर्तें
एलिबिलिटी: नवीन या पुराने उद्यमी-खासकर जिन्होंने ‘तरुण’ लोन चुका दिया हो- ‘तरुण प्लस’ लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
लोन प्रक्रिया: आवेदन गांव के बैंक शाखाएं, सरकारी बैंक, NBFCs, MFIs आदि से की जा सकती है.
दस्तावेज जरूरी: पहचान (आधार, पैन), व्यवसाय की जानकारी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट (नया व्यवसाय शुरू करने वालों के लिए) आवश्यक होती है।
गारंटी कवरेज: CGFMU की गारंटी सुविधा है, जिससे व्यापारी बगैर जमानत (कोलेटरल) के लोन ले सकते हैं।
मुख्य बातें:
– ब्याज दर बैंक की नीति, आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (CIBIL स्कोर), और बिजनेस रिस्क पर भी निर्भर करती है।
– कई बैंक महिला उद्यमियों को 0.25% से 0.50% तक ब्याज में छूट देते हैं।
– लोन के साथ बैंक प्रोसेसिंग फीस भी ले सकते हैं (लेकिन ज्यादातर मामलों में यह बहुत कम होती है या माफ कर दी जाती है)।