डॉलर ने तोड़ी रुपये की कमर, 91 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची भारतीय करेंसी

Rupee vs Dollar : मंगलवार यानी 16 दिसंबर को रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया है. इस वक्त कमजोर ग्लोबल सेंटिमेंट, विदेशी फंड के बाहर जाने और US ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता के कारण करेंसी पर दबाव बना रहा है. पॉजिटिव ट्रेड डेटा के बावजूद रुपया मजबूत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले संघर्ष कर रहा है.

डॉलर के मुकाबले 6% से अधिक गिर चुका है रुपया
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेशन के दौरान करेंसी गिरकर 91.075 प्रति डॉलर पर आ गई और आखिर में लगभग 0.3% गिरकर 91.0275 पर बंद हुई है. इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 6% से अधिक गिर चुका है. ये 2025 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली उभरती हुई मार्केट करेंसी में से एक बन गया है.

रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
ये लगातार चौथा सेशन है जब रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है. ट्रेडर्स ने कहा कि हेजिंग की मांग और पोर्टफोलियो से पैसे निकलने से दबाव बढ़ रहा है, जबकि US-भारत ट्रेड बातचीत को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क हैं. बाजार के जानकारों का मानना ​​है कि जब तक वॉशिंगटन के साथ बातचीत में कोई साफ नतीजा नहीं निकलता तब तक रुपये में कोई खास सुधार होने की संभावना नहीं है.

ट्रेड डेटा बेहतर

हालांकि नवंबर के ट्रेड डेटा से कुछ राहत मिली है. ज्यादा अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का निर्यात तेजी से बढ़ा है जिससे ट्रेड बातचीत में भारत की स्थिति मजबूत हुई और डील करने की जल्दबाजी का दबाव कम हुआ है. हालांकि, इस सुधार का असर अभी तक रुपये को सपोर्ट देने में नहीं दिखा है.

FII की बिकवाली और कमजोर ग्लोबल माहौल

विदेशी निवेशकों ने 2025 में अब तक 18 बिलियन डॉलर से अधिक के भारतीय शेयर बेचे हैं. ग्लोबल रिस्क-ऑफ माहौल ने मंगलवार को घरेलू बाजारों को भी प्रभावित किया, जिसमें बेंचमार्क निफ्टी 50 लगभग 0.6% गिर गया.