Who Decide Gold-Silver Rate: सोने-चांदी की कीमत सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है. 24 कैरेट वाला सोना जहां 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर गया है तो वहीं चांदी 2.83 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है. अगर बीते एक साल के आंकड़ों को देखें तो सोने की कीमत में 75 फीसदी की तेजी आई है तो चांदी 167 फीसदी तक महंगी हो चुकी है.
अमेरिका में ट्रंप के आने के बाद सोने-चांदी की कीमत में कितनी तेजी ?
अमेरिका में 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति पद की गद्दी संभाली. उनके इस पद पर बैठने के बाद से जियो पॉलिटिकल इतना इश्यू इतना बढ़ा कि सोने-चांदी की कीमत ने एक साल में तूफान मचा दिया. जो सोना 31 दिसंबर 2024 को 76162 रुपए प्रति 10 ग्राम का बिक रहा था, वो सालभर में 57033 रुपये चढ़कर 1 लाख 42 हजार रुपये को पार कर गया है. वहीं चांदी, जो 31 दिसंबर 2024 को 86017 रुपये प्रति किलो बिक रहा है वो आज 2.82 लाख रुपये पर पहुंच गया है. यानी ट्रंप के आने के बाद से ग्लोबल मार्केट में मचे उठापटक ने सोने-चांदी की कीमतों में आग लगा दी. चार दिन में ₹40 हजार चढ़ने के बाद अमेरिका से आई एक खबर से भरभराकर गिरी चांदी, सोना भी हुआ सस्ता, चेक करिए आज का रेट
ट्रंप की वजह से क्यों चढ़े सोने-चांदी के भाव
ट्रंप ने आने के साथ ही टैरिफ का बम फोड़कर दुनियाभर के देशों में ट्रेड वॉर शुरू कर दिया.तमाम देशों की इकोनॉमी पर इस टैरिफ और ट्रेड वॉर ने नकारात्मक इसर डाला. ग्लोबल इकोनॉमी हिल गई. दुनियाभर के शेयर बाजार क्रैश होने लगा. अस्थिरता के माहौल में निवेशकों ने सेफ हेवल की तलाश में सोने-चांदी की रुख किया. रूस-यूक्रेन जंग, वेनेजुएला पर अमेरिका का कब्जा, ईरान में गृहयुद्ध और फिर ट्रंप की धमकी और अब ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप की नीतियों ने दुनियाभर में तनाव बढ़ा दिया है. बढ़ते तनाव और ट्रेड वॉर बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं.
चांदी की कीमतों में सूनामी क्यों ?
सिर्फ सोना ही नहीं ट्रंप की नीतियों की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी में आई सूनामी, अमेरिका में ब्याज घटाने के लिए फेडरल रिजर्व पर ट्रंप के बढ़ते दवाब के चलते सोने में निवेश बढ़ रहा है. दुनियाभर के देश ट्रेड वॉर की आशंका से डरे हुए हैं, जिसकी वजह से वो सोना-चांदी खरीदने पर तुले हैं. दुनियाभर के ग्लोबल बैंकों की ओर से सोने की रिकॉर्डस्तर पर खरीदारी हो रही है. अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, क्योंकि , ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ रही है. कंपनियां प्रोडक्शन रुकने के डर से पहले से चांदी खरीदकर रख रही है. जिसकी वजह से चांदी की डिमांड हाई पर है. मांग बढ़ने से कीमतें हाई पर पहुंच गई हैं.
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की चालबाजी से सोना-चांदी पर क्या असर होगा ?
वेनेजुएला के तेल पर कब्जे के बाद ट्रंप ग्रीनलैंड को हथियाने पर तुले हैं. जिसकी वजह से अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रेड वॉर की आशंकाएं तेज हो गई है. ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की कोशिशों के चलते ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है तो वहीं EU भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं. जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है. इन वजहों से कीमती धातु सोने-चांदी की डिमांड बढ़ गई है.
कैसे तय होता है सोने का रेट ?
सोने की कीमत कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जिसमें सबसे बड़ा फैक्टर जियो पॉलिटिकल हैं.ज्वेलर्स जिस भाव पर सोना खरीदता है, उसे स्पॉट रेट यानी यानी हाजिर भाव कहते हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने कीमत क्या है, उसी पर उसका स्पॉट प्राइस तय होता है. MCX पर सोने की कीमत तय करने के लिए कई फैक्टर्स हैं, जैसे गोल्ड डिमांड, सप्लाई और ग्लोबल मार्केट में महंगाई.
भारत में कौन तय करता है सोने की कीमत ?
बुलियन मार्केट गोल्ड की कीमतों तो तय करता है.साल 2015 से पहले तक केवल लंदन में ही गोल्ड की कीमत तय होती थी, लेकिन मार्च 2015 में बुलियन मार्केट एसोसिएशन का नया यूनिट बनाया गया. ये संगठन ही सभी देशों के संगठनों से मिलकर सोने का स्पॉट प्राइस तय करती है. भारत में सर्राफा एसोसिएशन के सदस्यों मिलकर स्पॉट रेट तय करते हैं. बाजार खुलने के साथ ये स्टॉप रेट तय किए जाते हैं. चूंकि हर शहर के सर्राफा व्यापारी रेट तय करते हैं, इसलिए उनके रेट भी अलग-अलग होते हैं.