छत्तीसगढ़ के 4 जिलों में सिमटा नक्सलवाद, डेडलाइन से पहले नई सूची जारी, जानिए कितना है असर

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को खत्म करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की गई है, यानि इस तारीख तक राज्य से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो जाएगा. लेकिन डेडलाइन से पहले नक्सल प्रभावित जिलों की नई सूची जारी हुई है, जिसमें केवल 4 जिले ही से प्रभावित माने गए हैं, यानि चार जिलों में ही अब नक्सलवाद सिमट कर रह गया है. पिछले कुछ दिनों में लगातार नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जबकि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर समीक्षा बैठक की थी.

छत्तीसगढ़ के चार जिलों में नक्सलवाद
नक्सल प्रभावित जिलों की जो नई सूची जारी हुई है, उसमें छत्तीसगढ़ के केवल चार जिलों में ही नक्सलवाद प्रभावित माना गया है, जहां बस्तर संभाग का सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के साथ ही गरियाबंद जिला ही अब नक्सल प्रभावित है. इसके अलावा अन्य राज्यों के 2 और भी जिले इस सूची में शामिल किए गए हैं, यानि अब देश के केवल 6 जिले ही नक्सलवाद से प्रभावित हैं. डेडलाइन से पहले केंद्र सरकार की तरफ से जारी की गई सूची से स्पष्ट होता है कि अब नक्सलवाद सिमट चुका है, क्योंकि अब गिनती के ही जिले प्रभावित हैं और यहां भी नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है.

कार्रवाई होगी तेज
हालांकि नक्सल प्रभावित 6 जिलों में 3 जिले बस्तर संभाग में आते है, ऐसे में फोर्स ने इन जिलों से नक्सलवाद खत्म करने के लिए एक बार फिर कमर कस ली है, बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया फोर्स बस्तर संभाग के सातों जिले में अपना एंटी नक्सल ऑपरेशन जारी रखे हुए है, केंद्र सरकार की सूची के अनुसार अब टॉप प्रायोरिटी वाले जिलों में फोर्स अपना फोकस बनाने के साथ यहां तय समय सीमा में नक्सलवाद खत्म करेगी. ऐसे में माना जा रहा है कि अब फरवरी और मार्च के बीच इन जिलों में नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और तेज होती हुई नजर आएगी.

31 मार्च 2026 है डेडलाइन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन बहुत पहले तय कर दी थी. उन्होंने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा. जिसके बाद छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार फोर्स और पुलिस ने कार्रवाई की थी, जिसमें बड़ी संख्या में नक्सलियों को ढेर किया गया, जबकि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है, जिसके बाद नक्सली लगातार बेकफुट पर पहुंच चुके हैं, जबकि कई राज्यों से नक्सलवाद खत्म हो चुका है.