सुरक्षाबल के जवानों का नया टारगेट सेट, बस्तर में 15 दिनों से बड़े मिशन पर फोर्स, नक्सलियों के 53 स्मारक ध्वस्त

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवान लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च जैसे-जैसे पास आ रही है बस्तर में सुरक्षाबल के जवान लगातार अभियान चला रहे हैं। सुरक्षाबल के जवान सिर्फ माओवादी नेताओं और कैडर को खोजने के साथ-साथ सरेंडर करने को भी कह रहे हैं। इसके साथ ही नक्सलियों के स्मारक को भी ध्वस्त किया जा रहा है।

लेफ्ट-विंग एक्सट्रीमिज्म के फिजिकल सिंबल खासकर CPI (माओवादी) द्वारा सालों में मारे गए अपने टॉप नेताओं और कमांडरों के “सम्मान” में बनाए गए ‘मेमोरियल’ को भी मिशन मोड पर खत्म किया जा रहा है। यह इसलिए किया जा रहा है कि कभी नक्सल प्रभावित रहे गांवों को हिंसक और अशांत अतीत की याद नहीं आए।

अमित शाह के मीटिंग के बाद फैसला
रायपुर में 8 फरवरी को नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने समीक्षा की थी। होम मिनिस्टर अमित शाह के निर्देशों के बाद बस्तर में सुरक्षाबल के जवान लगाकार कार्रवाई कर रहे हैं। केंद्रीय रिजर्व फोर्स ने पिछले 15 दिनों में छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर और बस्तर में नक्सलियों के 53 स्मारकों को ध्वस्त किया है।

जवानों का नया टारगेट सेट
इन स्ट्रक्चर की लोकेशन-मैपिंग, स्थानीय लोगों की मदद से सीआरपीएफ की टीम ने फरवरी के आखिर तक सभी नक्सली स्मारक को गिराने का टारगेट सेट किया है। CRPF के एक सोर्स ने कहा कि इसके बाद साफ किए गए इलाकों में प्लांटेशन ड्राइव चलाया जाएगा। पिछले दो हफ्ते में जिन नक्सली स्मारकों को ध्वस्त किया गया है वे आम तौर पर पिरामिड या पगोडा जैसे कंक्रीट के बने हुए थे। जिनमें से कुछ के ऊपर CPI (माओवादी) का निशान होता है।

क्या कहा अधिकारियों ने
यह वे ‘मेमोरियल’ हैं जिन्हें मई 2025 में नारायणपुर में जनरल सेक्रेटरी नंबल्ला केशव राव उर्फ बसवराजू और जनवरी 2025 में गरियाबंद में सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामचंद्र प्रताप रेड्डी उर्फ चलपति को मार गिराने के बाद बनाया गया था। CRPF के एक सीनियर ऑफिसर ने हमारे सहयोगी TOI को बताया कि फोर्स की कोशिशें छत्तीसगढ़ के लोगों, खासकर बस्तर के आदिवासियों के मन से माओवादियों का डर खत्म करने की है।