‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद एक बार फिर गरमाता हुआ दिखाई दे रहा है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना और पॉडकास्टर रणवीर अलाहाबादिया के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों को पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है. कोर्ट ने समय रैना और रणवीर अलाहाबादिया को लेकर कहा कि वो खुद को युवाओं के लिए आदर्श के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में जिम्मेदारी से पेश आना जरूरी है.
हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले 10 लाख रुपये के जुर्माने की बात कही थी, लेकिन बाद में समय रैना की ओर से नरमी की अपील के बाद जुर्माने की राशि घटाकर 3 लाख रुपये कर दी गई.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना ने अदालत के आदेशों का उल्लंघन किया है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति समाज की भावनाओं और अदालत के निर्देशों का सम्मान नहीं करता है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे. अदालत ने ये भी साफ किया कि ये सिर्फ सजा देने का मामला नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी समझाने का प्रयास है.
पहले लगाया गया था 10 लाख रुपये का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआत में समय रैना पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया था. हालांकि, समय रैना के वकील ने कोर्ट से आखिरी मौका देने और नरमी बरतने की अपील की. वकील की दलीलों को देखते हुए अदालत ने जुर्माने की रकम कम करते हुए इसे 3 लाख रुपये कर दिया. साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर आगे भी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई में ज्यादा सख्त कार्रवाई की जा सकती है. कोर्ट ने 30 लाख रुपये तक के जुर्माने की चेतावनी भी दी.
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद
ये मामला पॉपुलर यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़ा हुआ है. इस शो में दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हुआ था. लोगों ने इन टिप्पणियों को आपत्तिजनक और असंवेदनशील बताया था. इसके बाद मामले में शिकायतें दर्ज हुईं और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सुनवाई की. अदालत ने कहा था कि किसी भी कम्यूनिटी या कैटेगरी के लोगों का अपमान करने वाली लैंग्वेज या कंटेंट को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है.
दिव्यांग लोगों के लिए करें काम
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और कॉमेडियंस को दिव्यांग लोगों के लिए काम करने और जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया था. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था कि पॉपुलैरिटी के साथ जिम्मेदारी भी आती है. अगर कोई व्यक्ति समाज में पहचान रखता है, तो उसे अपनी पहुंच का इस्तेमाल पॉजिटिव कामों के लिए करना चाहिए.
क्योर एसएमए फाउंडेशन ने उठाया था मामला
इस मामले में क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से याचिका दायर की गई थी. फाउंडेशन ने आरोप लगाया था कि कंटेंट क्रिएटर्स की टिप्पणियां दिव्यांग लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली थीं. फाउंडेशन की ओर से पेश वकील अपराजिता सिंह ने अदालत में कहा कि कुछ कार्यक्रम तो किए गए, लेकिन अदालत के निर्देश के अनुसार फाउंडेशन से कॉन्टैक्ट नहीं किया गया. उन्होंने समय रैना की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाए.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद समय रैना की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अदालत ने साफ कर दिया है कि फ्यूचर में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा. अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां कोर्ट आगे की स्थिति पर फैसला ले सकता है.