चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने इस साल अधिकारियों के विदेशी दौरों के लिए 6 करोड़ 90 लाख रुपये का बजट तय किया था। यह राशि अफसरों की विदेश यात्राओं पर खर्च की जानी थी, लेकिन अब सरकार इस बजट को आधा या उससे भी कम करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही सरकार ने बुधवार रात एक बड़ा फैसला लेते हुए सितंबर तक सभी अफसरों के विदेशी दौरों पर रोक लगा दी है। हालात अगर ऐसे ही रहे तो यह रोक आगे भी बढ़ाई जा सकती है।
वित्त विभाग के अनुसार अलग-अलग विभागों के लिए विदेश यात्रा भत्ते का अलग-अलग बजट तय किया गया है। इसमें मुख्य सचिवालय के लिए 4 करोड़ रुपये, सिंचाई विभाग के लिए ढाई करोड़ रुपये, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के लिए 30 लाख रुपये शामिल हैं। इसके अलावा कृषि, पशुपालन, सहकारिता और अन्य छोटे विभागों के लिए भी सीमित राशि का प्रावधान किया गया है। पिछले साल की तुलना में इस बार विदेश यात्रा बजट में करीब 175 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि पिछले वर्ष यह केवल ढाई करोड़ रुपये था।
सिंचाई विभाग के बजट में बड़ी बढ़ोतरी
इस बार मुख्य सचिवालय और सिंचाई विभाग के बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि अब सरकार इस खर्च को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रही है। अधिकारियों के विदेश दौरे पर रोक के दौरान केवल चिकित्सीय आपात स्थिति में ही विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम खर्च में संतुलन और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है।
मंत्रियों व अफसरों की गाड़ियों के तेल के लिए दस करोड़ फूंकेंगे
हरियाणा में मंत्रियों व अफसरों की गाड़ियों के तेल के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया था। वित्त विभाग के मुताबिक मंत्रियों की गाड़ियों के लिए करीब छह करोड़ और अफसरों की गाड़ियों के लिए चार करोड़ 20 लाख का प्रावधान किया गया है। हरियाणा सरकार ने सितंबर 2026 तक सभी विभागों के पेट्रोलियम संबंधी व्यय में 20 प्रतिशत की कमी लाने का फैसला किया है। इसमें इस बार यह भी प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक विभाग को हर महीने बताना होगा कि वाहन उपयोग में कम से कम दस फीसदी की कमी बतानी होगी। इसके लिए हरियाणा सरकार अनुपालन व बचत की निगरानी के लिए एक विशेष पोर्टल भी विकसित करने की तैयारी में है।
वित्त वर्ष में सिर्फ दो विदेश दौरे का है प्रावधान
सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों की विदेश यात्राओं को लेकर पिछले साल नई व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत सरकारी खर्च पर की जाने वाली विदेश यात्राओं की संख्या सीमित कर दी गई है। अब किसी अधिकारी को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम एक आधिकारिक विदेश यात्रा और एक निजी विदेश यात्रा की ही अनुमति मिलेगी। वहीं, यदि कोई अधिकारी अपने निजी खर्च पर विदेश जाना चाहता है, तो उसे भी एक वित्तीय वर्ष में केवल एक निजी यात्रा की अनुमति होगी।