Haryana News: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार द्वारा बुज़ुर्गों की पेंशन के नियमों में किए गए बदलावों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सरकार का यह फैसला बेहद असंवेदनशील है। इन बदलावों से बुज़ुर्गों की थाली से भोजन छीनने की तैयारी की जा रही है और इससे राज्य के हजारों गरीब किसान व बुजुर्ग पेंशन से बाहर हो सकते हैं।
अनुराग ढांडा ने कहा कि सरकार अब उन बुज़ुर्गों की पेंशन काटने की सोच रही है, जिनके पास चार एकड़ से अधिक जमीन है या जो “मेरी फसल–मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर फसल बेचते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 1.80 लाख रुपये की फसल बिक्री को भी संपन्नता का पैमाना मानने लगी है, जबकि फसल की बिक्री शुद्ध आमदनी नहीं होती।
इसमें खेती की लागत, मेहनत, बीज, खाद और जुताई का खर्च भी शामिल होता है। वहीं ढांडा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गरीबी और अमीरी के फर्क को समझने में असफल रहे हैं। एक तरफ भाजपा किसानों को 5100 रुपये देने के वादे करती है, वहीं दूसरी तरफ गरीब किसानों और बुज़ुर्गों की पेंशन तक छीनने पर उतारू है।
परिवार की आय जोड़ना भी अन्यायपूर्ण
उन्होंने बताया कि कई मामलों में बुज़ुर्गों के परिवार के अन्य सदस्यों की आय भी जोड़ी जा रही है, जबकि वे अलग रहते हैं। इस फैसले से गरीब बुज़ुर्ग परेशान हैं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो गए हैं। ढांडा ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि सेवा करने के बजाय सरकार बुज़ुर्गों को मानसिक तनाव और बेवजह की भागदौड़ झेलने पर मजबूर कर रही है।
बुढ़ापा पेंशन बुज़ुर्गों का अधिकार
अनुराग ढांडा ने साफ कहा कि बुढ़ापा पेंशन कोई सरकारी मेहरबानी नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों का संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है। भाजपा सरकार पोर्टल और तकनीकी नियमों के नाम पर इस अधिकार को छीनने की कोशिश कर रही है, जिसे आम आदमी पार्टी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी।
23 लाख बुज़ुर्गों की आजीविका का सवाल
उन्होंने बताया कि हरियाणा में लगभग 23 लाख बुज़ुर्ग बुढ़ापा पेंशन पर निर्भर हैं। अगर सरकार सच में बुज़ुर्गों का सम्मान करना चाहती है, तो पोर्टल की गलतियों का बोझ उन पर डालना बंद करे। वरना यह साफ हो जाएगा कि सरकार बुज़ुर्गों और किसानों का हक छीनने की नीति अपना रही है।
नियम तुरंत वापस लेने की मांग
अनुराग ढांडा ने मांग की कि बुढ़ापा पेंशन से जुड़े सभी प्रस्तावित बदलाव तुरंत वापस लिए जाएं। खेती की कुल फसल बिक्री को आय मानने का नियम खत्म किया जाए और किसी भी पात्र बुज़ुर्ग की पेंशन बंद न की जाए। साथ ही पेंशन व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और मानवीय बनाया जाए।