चंडीगढ़। हरियाणा में साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान अब और तेज होगा। विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगते सोनीपत और झज्जर जिलों में, जहां डिजिटल अपराध पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने पांच नए साइबर थाने खाेले हैं। झज्जर, बहादुरगढ़, गोहाना और सोनीपत पूर्व व पश्चिम में खोले गए इन साइबर थानों से आनलाइन ठगी, धोखाधड़ी और इंटरनेट मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट-टिप्पणी के मामलों की जांच में तेजी आएगी।
गृह सचिव सुधीर राजपाल ने पांच नए साइबर थाने बनाने की अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं, वर्ष 2023 में पंचकूला में स्थापित राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र (एस4सी) की क्षमताओं के विस्तार का काम भी शुरू हो गया है।
साइबर धोखाधड़ी शिकायत प्रबंधन, बैंक समन्वय, म्यूल अकाउंट, जांच निगरानी, मोबाइल एवं यूआरएल ब्लाकिंग जैसी मौजूदा इकाइयों के अलावा हाल ही में एआइ इंटीग्रेशन सेल, इंटरनेट मीडिया मानिटरिंग यूनिट, क्रिएटिव अवेयरनेस यूनिट तथा सीक्रेट सेल स्थापित किए गए हैं। जल्द ही प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा।
साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका
प्रदेश में 29 साइबर थाने पहले से संचालित हैं और 675 पुलिस कर्मचारी साइबर अपराध की जांच में लगाए गए हैं। इसके अलावा 9100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिनकी साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका होगी। दो पुलिस अधिकारियों को साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किया गया है तथा अगले चरण में 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के लिए चुने गए हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र के लिए आवश्यक मानव संसाधन की स्वीकृति में तेजी लाने, प्रौद्योगिकी आधारित पुलिसिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित साइबर निगरानी तथा संस्थागत क्षमता को और सुदृढ़ करने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अभियोजन और पीड़ित सहायता व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। इससे बदलते डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकेगा।
होगी जीरो एफआईआर
प्रदेश में 25 जून से ई-जीरो एफआइआर सुविधा लागू कर दी गई है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रानिक जीरो एफआइआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं, जिससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित होगी।
इंटरनेट मीडिया से हटाई 14 हजार आपत्तिजनक सामग्री
सहयोग पोर्टल के माध्यम से जनवरी से जून के बीच 14 हजार 139 आपत्तिजनक और अवैध आनलाइन सामग्री हटाई गई है। इसमें फिशिंग वेबसाइट, फर्जी विज्ञापन, धोखाधड़ी से जुड़ी इंटरनेट मीडिया पोस्ट, फिशिंग गूगल विज्ञापन तथा बिना सहमति साझा की गई निजी आपत्तिजनक सामग्री शामिल है।