चंडीगढ़: पिछले कई दिनों से जारी बारिश से डेंगू-मलेरिया के केसों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हरियाणा में बीते दिनों डेंगू के 36 नए केस सामने आए हैं। नए केसों को मिलाकर राज्य में डेंगू के कुल 436 मरीज अब तक आ चुके हैं। जिन शहरों में सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं, उनमें रेवाड़ी (124), गुरुग्राम, (49) और सोनीपत (33) शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अब तक किसी शहर में डेंगू से मौत नहीं हुई है।
20 अगस्त तक कुल 2.6 करोड़ घरों का कई बार दौरा किया गया, जिनमें 1.23 लाख घरों में लार्वा पाए गए। 31 अगस्त तक 39 हजार 724 घरों को नोटिस जारी किया गया, जिनके घरों में मच्छरों का प्रजनन पाया गया है। हरियाणा में पिछले 27 जुलाई से लगातार बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। इससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बारिश, नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रहा है।
इससे मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और उम्मीद कर रहे हैं कि आगे इनकी संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. राजीव बातिश के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीमें फील्ड में जुटी हुई हैं। घर-घर सर्वे के साथ लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। जनजागरूकता की वजह से डेंगू व मलेरिया को रोका जा सकता है। हरियाणा में 436 केसों में प्राइवेट अस्पताल व क्लीनिक में 234 केस पॉजिटिव मिले, जबकि 202 सरकारी अस्पतालों व पीएचसी में मिले हैं।
मलेरिया के केस 100 पार
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया को काफी हद तक काबू कर लिया था। 2021 से 2023 तक मलेरिया के केस 100 से पार नहीं हुए थे। मगर पिछले सीजन से मरीजों में बढ़ोतरी होने लगी है। 2024 में मलेरिया के 124 केस सामने आए थे, जबकि इस बार चार सितंबर को ही मलेरिया के केस 112 हो गए हैं। वहीं, जिन शहरों में पिछले दो साल से मलेरिया केस नहीं आ रहे, अब वहां भी मलेरिया केस दर्ज किए गए हैं। कुरुक्षेत्र में पिछले दो साल से मलेरिया के केस नहीं आ रहे थे, मगर इस बार वहां भी दो केस आए हैं।
इसी तरह भिवानी में भी मलेरिया के केसों को भी काबू कर लिया गया था, वहां भी दो केस दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कुरुक्षेत्र में जो केस दर्ज किए गए हैं, दोनों ही प्रवासी नागरिक हैं। दरअसल मलेरिया के पैरासाइट लिवर में पहुंचते हैं, जो तुरंत नहीं बल्कि कुछ दिन बाद जब वे परिपक्व हो जाते हैं तो उसका असर शरीर में दिखने लगता है। जिससे मलेरिया के लक्षण काफी दिन बाद दिखते हैं, जो रुटीन के चेकअप में पकड़ में भी नहीं आते हैं।