चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने भूमि की खरीद संबंधी नीति 2025 के संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत विकास परियोजनाओं को दी जाने वाली जमीन का दाम किसान अपने हिसाब से लगा सकेंगे।
पहले किसान को मौजूदा कलेक्टर रेट से अधिकतम तीन गुना बोली लगाने की मंजूरी थी। इससे विशेष रूप से उन गांवों में जहां कलेक्टर दर बाजार दर से काफी कम थे वहां वास्तविक जमीन के प्रस्ताव प्राप्त करने में सरकार को काफी दिक्कतें आ रही थी। अब सरकार ने इस उपनियम को ही हटा दिया है।
एफसीआर डाॅ. सुमिता मिश्रा की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक भूमि की खरीद संबंधी नीति के पैरा 4 के उप-पैरा 4.1 में स्वीकार्य सहमति/प्रस्ताव से संबंधित एक नया प्रावधान भी जोड़ा गया है। इस प्रावधान के अनुसार यदि कोई भू-मालिक स्वयं या किसी एग्रीगेटर के माध्यम से ई-भूमि पोर्टल पर अपनी सहमति अपलोड करता है और वह सभी शर्तों को पूरा करता है तो ऐसी सहमति को भी वैध माना जाएगा।
पहले के नियमों के मुताबिक किसान ई-भूमि पोर्टल पर अपनी भूमि का प्रस्ताव केवल संबंधित जिले के कलेक्टर दर से अधिकतम तीन गुना दर तक ही दे सकता था जो भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 के तहत निर्धारित होती है।
मगर इससे न तो किसान का फायदा पहुंच रहा था और न ही सरकार को जमीन मिल रही थी। हरियाणा सरकार ने इस नीति की समीक्षा की और कलेक्टर रेट से तीन गुना बोली लगाने की शर्त ही हटा दी। अब किसान बाजार के मूल्य के हिसाब से अपनी जमीन की बोली लगा सकेंगे।