हरियाणा के 1.5 लाख किसानों के लिए खुशखबरी, सरकार ने मंजूर किए 370 करोड़ रुपए

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि किसानों के लिए जो भी योजना बनाई जाए उनका सरलीकरण होना चाहिए। किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया में जो भी दिक्कत आई है उन समस्याओं का निदान होना चाहिए।

मुख्यमंत्री नायब सैनी सचिवालय में ई-क्षतिपूर्ति के संबंध में समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक दौरान प्रदेश सरकार ने खरीफ 2025 फसल मुआवजा योजना तहत 370.52 करोड़ रुपए जारी करने की मंजूरी भी दी है। मुख्यमंत्री सैनी द्वारा स्वीकृत इस निर्णय से राज्यभर के 1.5 लाख से अधिक किसानों के खातों में सीधे राशि स्थानांतरित की जाएगी। यह स्वीकृत राशि उन दावों से संबंधित है जो तकनीकी जांच के कारण पहले लंबित रखे गए थे, जिनमें डुप्लीकेट या समान फोटोग्राफिक साक्ष्य वाले मामले भी शामिल थे। मुआवजा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से जारी किया जा रहा है, जो ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ प्रणाली से एकीकृत एक पारदर्शी और किसान-अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

बैठक दौरान अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण में सरकार ने 10 दिसम्बर 2025 को 53,821 किसानों को 116.15 करोड़ रुपए जारी किए थे। पोर्टल पर आवेदन करने के बाद इस प्रणाली ने 5500 से अधिक संदिग्ध प्रविष्टियों सहित अपात्र और फर्जी दावों को सफलतापूर्वक छांट दिया है जिससे सार्वजनिक धन की सुरक्षा के साथ वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक मिल सके। सैनी ने विभागों को निर्देश दिए कि मुआवजा राशि का भुगतान जल्द किसानों के बैंक खातों में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुरब्बा लैवल तक हुई जियो-रैफरैसिंग प्रक्रिया
बैठक दौरान अधिकारियों ने कहा कि एग्रीस्टैक और जियो-रैफरेंस्ड वैरीफिकेशन जैसी उन्नत डिजिटल तकनीकों के उपयोग से हरियाणा कृषि क्षेत्र में आपदा राहत प्रबंधन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है। हरियाणा में जियो-रैफरैसिंग प्रक्रिया को मुरब्बा स्तर तक लागू किया जा चुका है। इसके अंतर्गत प्रत्येक खेत/मुरब्बे की सटीक लोकेशन दर्ज की गई है जिससे भूमि का स्पष्ट और प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार हुआ है। इस प्रणाली के माध्यम से फसल का प्रकार, क्षेत्रफल और वास्तविक स्थिति का डाटा पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो रहा है। इस पहल से फसल निगरानी, नुकसान के आंकलन तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लाभ होगा। जियो-रैफरैसिंग के कारण सही लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, साथ ही गलत दावों में कमी आएगी और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।