चंडीगढ़: हरियाणा और पंजाब के मध्य एसवाईएल के विषय को लेकर मंगलवार को चंडीगढ़ में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में इस विषय पर बिंदुवार विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी और पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिन्द्र गोयल भी मौजूद रहे।बैठक के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों ने मीडिया से कहा कि अब दोनों राज्यों के अधिकारी इस विवादित मुद्दे पर आगे की बैठकें करेंगे।
एक घंटे से अधिक चली बैठक
चंडीगढ़ के एक होटल में हुई यह बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली। दोनों नेताओं ने बताया कि बैठक सकारात्मक माहौल में हुई और इससे सार्थक परिणाम निकलने की संभावना है। सीएम सैनी ने कहा, “जब चर्चाएं अच्छे माहौल में होती हैं तो उनसे सार्थक नतीजे निकलते हैं।” पंजाब के सीएम मान ने भी बैठक को सौहार्दपूर्ण बताया और कहा, “हरियाणा हमारा शत्रु नहीं बल्कि हमारा भाई है। बैठक में हमने अपने-अपने पक्ष रखे। उच्चतम न्यायालय और केंद्र ने हमें इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए कहा था।”
क्या है एसवाईएल नहर का मामला
एसवाईएल नहर का निर्माण रावी और ब्यास नदियों के पानी के प्रभावी बंटवारे के लिए प्रस्तावित किया गया था। परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर शामिल थी, जिसमें 122 किलोमीटर पंजाब में और 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाना था। हरियाणा ने अपने हिस्से का निर्माण पूरा कर लिया है, लेकिन पंजाब ने 1982 में शुरू किए गए कार्य को रोक दिया।
साल 1996 में हरियाणा के दायर मुकदमे में सर्वोच्च न्यायालय ने 2002 में हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाया और पंजाब को अपने हिस्से का निर्माण करने का निर्देश दिया। पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य के पास दूसरों के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और वह सिंधु नदी के पानी में अपना उचित हिस्सा मांग रही है। हरियाणा भी अपने हिस्से का पानी पाने की मांग कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C.R. पाटिल ने पिछले साल 7 जुलाई और 5 अगस्त को दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठकें बुलाई थीं। इनमें पंजाब ने चिनाब नदी के पानी के उपयोग और एसवाईएल नहर के विकल्प के रूप में यमुना-सतलुज लिंक (वाईएसएल) नहर का सुझाव भी रखा था।