Heart Attacks Medicine Side Effects: बीटा ब्लॉकर्स आमतौर पर हार्ट से जुड़ी कई परेशानियों, जिसमें हार्ट अटैक भी शामिल है, के लिए इस्तेमाल में लाई जाती है. हालांकि ये उन मरीजों के लिए फायदेमंद नहीं है, जिन्हें मायोकार्डियल इन्फार्कशन यानी आम बोलचाल की भाषा में कहें तो हार्ट अटैक पड़ा हो.
बीटा ब्लॉकर्स महिलाओं के लिए खतरनाक
मैड्रिड में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत और द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन और यूरोपियन हार्ट जर्नल में एक साथ पब्लिश्ड इस स्टडी से पता चला है कि बीटा ब्लॉकर्स से जिन महिलाओं का इलाज किया गया उनकी डेथ और हार्ट अटैक रिस्क उन महिलाओं की तुलना में ज्यादा था जिन्हें ये नहीं दी गईं. हालांकि, पुरुषों में ऐसा नहीं देखा गया.
क्लिनिकल गाइडलाइंस को नया रूप देगा
माउंट सिनाई फस्टर हार्ट हॉस्पिटल के चेयरमैन और सीनियर इन्वेस्टिगेटर वैलेंटिन फस्टर ने कहा, “यह स्टडी सभी इंटरनेशनल क्लिनिकल गाइडलाइंस को नया रूप देगा.”
स्टडी की दिशा में एक जरूरी प्रोग्रेस
स्पेन स्थित सेंट्रो नैशनल डी इन्वेस्टिगेशियोनेस कार्डियोवैस्कुलरेस (सीएनआईसी) के साइंटिफिक डायरेक्टर और प्रिंसिपल रिसर्चर बोर्जा इबानेज ने कहा, “प्रेजेंट में, बिना किसी कॉम्प्लेक्सिटी वाले मायोकार्डियल इन्फार्क्शन वाले 80% से ज्यादा मरीजों को बीटा ब्लॉकर्स पर छुट्टी दे दी जाती है. ये कॉन्क्लूजन इस दिशा में एक जरूरी प्रोग्रेस है.”
बीटा ब्लॉकर्स के साइड इफेक्ट्स
हालांकि आम तौर पर सेफ माने जाने वाले बीटा ब्लॉकर्स थकान, ब्रैडीकार्डिया (हृदय गति कम होना) और यौन रोग जैसे साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकते हैं.
109 अस्पतालों के 8,505 मरीजों पर स्टडी
इस इंटरनेशनल स्टडीज में स्पेन और इटली के 109 अस्पतालों के 8,505 मरीजों को शामिल किया गया. पार्टिसिपेंट्स को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बीटा ब्लॉकर्स लेने या न लेने के लिए उनकी इच्छा के अनुरूप चुना गया. बाकी सभी मरीजों को वर्तमान स्टैंडर्ड के अनुसार केयर दी गई और ऐसा लगभग चार सालों तक किया गया.
दोनों ग्रुप में कोई फर्क नहीं दिखा
रिजल्ट्स में दोनों ग्रुप्स के बीच मरने वालों की संख्या, बार-बार दिल का दौरा पड़ने या हार्ट फेल्योर से अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई बड़ा फर्क नहीं दिखा.
फॉलो-अप स्टडी में पाया गया
एक सब ग्रुप एनालिसिस में पाया गया कि बीटा ब्लॉकर्स से इलाज की गई महिलाओं में इसके असर ज्यादा देखे गए. 3.7 सालों के फॉलो-अप स्टडी के दौरान पाया गया कि जिन्हें बीटा ब्लॉकर्स नहीं दी गई उनकी मौत का आंकड़ा जिन्हें दिया गया उनके मुकाबले कम था.