शिमला: हिमाचल प्रदेश में फ्री बिजली को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. जयराम ठाकुर की पिछली भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई 125 यूनिट फ्री बिजली योजना से लोगों को राहत मिली थी, वहीं सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले 300 यूनिट मुफ्त बिजली का बड़ा वादा किया था. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 गारंटियों के साथ जनता का भरोसा जीता, जिसमें हर परिवार को 300 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा भी शामिल था. करीब 22 लाख बिजली उपभोक्ताओं वाले प्रदेश में यह वादा निर्णायक साबित हुआ और कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली.
40 महीने बाद बदली शर्तों के साथ ऐलान
सरकार बनने के करीब 40 महीने बाद अब 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा तो पूरी हुई, लेकिन एक बड़ी शर्त के साथ यह सुविधा अब केवल एक लाख गरीब परिवारों तक सीमित कर दी गई है. इसके लिए बिजली बोर्ड को आदेश भी जारी कर दिए गए हैं. हिमाचल प्रदेश सरकार ने अत्यंत गरीब एक लाख परिवारों के लिए एक मीटर पर 300 यूनिट तक पूर्ण सब्सिडी को स्वीकृति दी है, जो HPERC द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित दरों पर आधारित होगी, जिसमें कहा गया है कि इन परिवारों को बिना CESS, ED, और M-टैक्स के शून्य बिजली बिल (Zero Bill) दिया जाएगा. इन परिवारों की सूची संबंधित सरकारी विभाग की ओर से HPSEBL को प्रदान की जाएगी.
125 यूनिट फ्री बिजली पर शर्त, किराएदारों पर बोझ
प्रदेश भर में अभी हर मीटर पर करीब 14.50 लाख उपभोक्ताओं को दी जाने वाली 125 यूनिट फ्री बिजली पर भी सरकार ने नई सीमा तय कर दी है. अब प्रति राशन कार्ड दो से अधिक मीटरों पर कोई सब्सिडी नहीं दी जाएगी. 15 अप्रैल से इसके लिए आवेदन होगा. यानी प्रदेश में एक परिवार को केवल दो बिजली मीटरों पर ही इस सुविधा का लाभ मिलेगा. ऐसे में राशनकार्ड दर्ज संयुक्त परिवारों को इसका अधिक नुकसान होगा, जिससे कई उपभोक्ता इस सुविधा के दायरे से बाहर हो जाएंगे. सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर शहरों में किराए का कमरा रहने वाले लाखों लोगों पर पड़ेगा. जहां अलग-अलग मीटरों के कारण उन्हें पहले जो राहत मिल रही थी, अब वह खत्म होती दिख रही है.
हर साल 713.28 करोड़ का बोझ
हिमाचल में पूर्व की जयराम सरकार की 125 यूनिट फ्री बिजली देने की सुविधा में सुक्खू सरकार ने अभी तक जारी रखा है, लेकिन अब इसमें नई शर्त जोड़कर एक परिवार को केवल दो मीटरों पर ही 125 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी. वर्तमान में उपभोक्ताओं को 125 यूनिट फ्री बिजली देने पर सरकार के खजाने पर हर साल 713.28 करोड़ का बोझ पड़ रहा है. महीने के हिसाब से देखा जाए तो प्रदेश सरकार हर महीने 125 यूनिट फ्री बिजली देने की सुविधा पर 59.44 करोड़ खर्च कर रही है. हालांकि खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रही सुक्खू सरकार ने विधानसभा बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्बाल और भरमौर से विधायक डॉ जनकराज के 125 यूनिट फ्री बिजली को लेकर पूछे गए सवाल पर लिखित उत्तर में जानकारी दी है कि 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की गांरटी दी गई थी. इसे पात्र उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि पहले चरण में चुने हुए करीब एक लाख निर्धन परिवारों को यह सुविधा वर्ष 2026-27 में दी जाएगी.
हर साल 228 करोड़ का बोझ
हिमाचल में अब वित्त वर्ष में प्रदेश के 1 लाख गरीब परिवारों को एक मीटर पर 300 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी, जिसके लिए सरकार की तरफ से बिजली बोर्ड को ऐसे परिवारों को चयन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए बिजली बोर्ड को ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग का सहयोग लेना होगा. इसी विभाग के पास प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों की सूची उपलब्ध है. इस तरह से प्रदेश में एक लाख परिवारों का चयन कर उनको 300 यूनिट फ्री बिजली की सुविधा का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा. इस सुविधा के शुरू करने से सरकार की जेब पर हर महीने करीब 19 करोड़ का बोझ पड़ेगा. यानी सरकार को हर साल इस सुविधा पर करीब 228 करोड़ खर्च करने होंगे.
बिजली बोर्ड 3390 करोड़ के घाटे में
प्रदेश का बिजली बोर्ड पहले ही 3390 करोड़ रुपये के भारी घाटे से जूझ रहा है. ऐसे आर्थिक दबाव के बीच सरकार की ओर से 1 लाख परिवारों को 300 यूनिट और एक ही परिवार के दो मीटरों पर 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है. बढ़ते घाटे, राजस्व की सीमित संभावनाओं और सब्सिडी के बोझ के बीच इस योजना को लागू करना वित्तीय संतुलन पर असर डाल सकता है.