हिमाचल बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने इस्पात कम्पनी को पहुंचाया करोडों का फायदा, दर्ज हुई FIR

शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) में बड़े स्तर पर गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। इसे लेकर विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला बोर्ड के ही चेयरमैन व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ है। मामला सोलन जिला के बरोटीवाला स्थित निजी कंपनी मि. गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने इस इस्पात कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाया औऱ इससे बिजली बोर्ड को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

मामले में तीन तत्कालीन अधिकारियों को नामजद किया गया है। वहीं कम्पनी के निदेशकों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। शिकायत के अनुसार मार्च 2025 में यह मामला विजिलेंस के पास पहुंचा था। जांच के बाद पाया गया कि बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने निजी कंपनी को बिना बकाया राशि जमा करवाए ही बिजली की आपूर्ति फिर से बहाल कर दी। यह प्रक्रिया नियमों को दरकिनार कर जल्दबाजी में पूरी की गई। आरोप है कि 2009 के एचपीईआरसी सप्लाई कोड और वित्त एवं लेखा शाखा से अनिवार्य मंजूरी लिए बिना ही आदेश जारी किए गए।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस पूरी कार्रवाई से निजी कम्पनी को अनुचित लाभ मिला और बोर्ड को करीब 11.84 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ। इसके अलावा बरोटीवाला विद्युत उपमंडल कार्यालय में कंपनी के खाते का मिलान भी नहीं किया गया। शिकायत के अनुसार 6 अक्टूबर 2012 को गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की बिजली आपूर्ति लंबित बकाया राशि चुकाए बिना ही दोबारा बहाल कर दी गई। यह प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखकर एक ही दिन में जल्दबाजी में पूरी की गई। इस दौरान वित्त एवं लेखा शाखा से अनिवार्य मंजूरी भी नहीं ली गई। सप्लाई कोड 2009 की धारा 7.2.1 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर कंपनी को विशेष लाभ दिया गया। जांच में सामने आया कि इस कार्रवाई से बोर्ड को लगभग 11.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और कंपनी को सीधा फायदा मिला। शिकायत के मुताबिक यह सब कुछ तत्कालीन सीएमडी की मंजूरी से हुआ था। विजिलेंस ने अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए और अन्य प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण के सामने आने से बोर्ड में हड़कंप मच गया है और विजिलेंस की जांच से कई और परतें खुलने की संभावना है।

विजिलेंस मुख्यालय को मार्च, 2025 में बोर्ड के चेयरमैन संजय गुप्ता की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी। इस शिकायत में बोर्ड अधिकारियों और कंपनी की मिलीभगत का आरोप लगाया गया था। विजिलेंस ने इस पर प्रारंभिक जांच शुरू की और धारा 17-ए पीसी (संशोधित) अधिनियम, 2018 के तहत आवश्यक अनुमति भी प्राप्त की। सरकार की ओर से अनुमति 23 जून, 2025 को मिल गई थी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच में यह भी पाया गया कि बारोटीवाला विद्युत उपमंडल कार्यालय द्वारा खातों का मिलान (रिकन्सिलिएशन) भी नहीं किया गया। अब विजिलेंस ने इस पूरे मामले में आपराधिक मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। इसे लेकर बिजकी बोर्ड में हड़कम्प मच गया है।