नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सी-ग्रेड सेब को अब बाजार में औने-पौने दामों में बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी, बल्कि इन सेबों से जूस, जैम, जैली और स्क्वैश जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसके लिए अगले सेब सीजन से प्रदेश में करीब 20 हजार मीट्रिक टन सी-ग्रेड सेब की प्रोसेसिंग निजी कंपनियां करेंगी।
इस योजना को बागवानी विभाग, उद्योग विभाग और निजी कंपनियों की संयुक्त भागीदारी से लागू किया जाएगा। इससे बागवानों को दोहरा फायदा मिलेगा, सी-ग्रेड सेब का समय पर भुगतान भी होगा और ए-ग्रेड सेब को बाजार में बेहतर कीमत भी मिल सकेगी।
अगले सीजन से लागू होगी नई व्यवस्था
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश स्टोन फ्रूट एसोसिएशन और संयुक्त किसान मंच के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद इस योजना को अगले सेब सीजन से लागू करने के निर्देश एचपीएमसी अधिकारियों को जारी कर दिए हैं।
स्टोन फ्रूट एसोसिएशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष दीपक सिंघा ने बताया कि वर्ष 2019 में खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा ऊना में स्थापित क्रीमिका फूड पार्क में सेब प्रोसेसिंग के लिए 24 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसी फूड पार्क में अगले सीजन से 20 हजार मीट्रिक टन सेब प्रोसेस किए जाएंगे।
प्रोसेसिंग ही अब सहारा
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एमआईएस योजना के बजट को बंद कर दिया गया है। ऐसे में निजी कंपनियों के सहयोग से सेब प्रोसेसिंग कर बागवानों को राहत देना अब जरूरी हो गया है। प्रदेश सरकार से यह भी मांग की गई है कि माइक्रो प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए बागवानों को अनुदान दिया जाए, ताकि ग्रामीण स्तर पर भी प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिल सके।
स्टोन फ्रूट से भी बनेंगे प्रीमियम उत्पाद
दीपक सिंघा ने यह भी बताया कि सरकार से स्टोन फ्रूट (आड़ू, खुबानी, आलूबुखारा) की प्रोसेसिंग कर प्रीमियम उत्पाद तैयार करने की मांग की गई है। मई से जून के बीच एचपीएमसी के प्रोसेसिंग प्लांट में इन फलों के उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिससे किसानों की आय में और बढ़ोतरी होगी।