हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, कुल्लू के डीसी-एसपी के तबादले और SIT जांच के निर्देश

शिमला: प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुल्लू के कसोल (पार्वती घाटी) में नियमों को ताक पर रखकर आयोजित की गई रेव पार्टी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह में कुल्लू के डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम को ट्रांसफर करने के आदेश जारी किए हैं।साथ ही इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और पूरे मामले की जांच के लिए डीआईजी स्तर के अधिकारी की देखरेख में एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि प्रशासनिक विश्वास बहाल करने के लिए कुल्लू में तुरंत योग्य आईपीएस कैडर के एसपी को तैनात किया जाए, जो एसआईटी का हिस्सा भी होंगे। खंडपीठ ने कहा कि आयोजकों और अधिकारियों के बीच के गठजोड़ की जांच के लिए डीआईजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में तीनों जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। सुनवाई 6 अगस्त को अनुपालन रिपोर्ट के साथ होगी।

जनहित याचिका में बताया गया है कि कसोल के ग्रीन फॉरेस्ट में 7 जून से 11 जून तक बड़े पैमाने पर रेव पार्टी का आयोजन किया गया था। इस पार्टी में देश-विदेश (बंगलूरू, हैदराबाद, गोवा, दिल्ली, चंडीगढ़ और इजराइल) से हजारों पर्यटक पहुंचे थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि 5 जून को ही मणिकर्ण के थाना प्रभारी और पुलिस उपअधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि इस सुनसान जंगली इलाके में 3 हजार से 3,500 लोगों के जुटने की उम्मीद है। वहां मादक पदार्थों की तस्करी और उपभोग की पूरी संभावना है।

थाने में सीमित पुलिस बल होने के कारण हर व्यक्ति पर नजर रखना मुमकिन नहीं होगा। अदालत ने पाया कि इस गंभीर और प्रतिकूल रिपोर्ट के बावजूद अगले ही दिन 6 जून को एसडीएम की ओर से आयोजकों को लाउड म्यूजिक बजाने की अनुमति दे दी गई। अदालत ने पाया कि कुल्लू के एसपी मदन लाल ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि मौके पर कोई सीसीटीवी कैमरा चालू नहीं मिला। जबकि डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक वहां 10-15 सीसीटीवी कैमरे लगे थे और उन्होंने खुद मौके से डीवीआर जब्त कर पुलिस को सौंपा था। एसपी के इस विरोधाभासी बयान पर कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई।

न्यायालय ने कहा कि अगर 9 जून को कोर्ट की वेकेशन बेंच ने दखल न दिया होता, तो यह पार्टी प्रशासन की नाक के नीचे 11 जून तक मजे से चलती रहती। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक सरेंडर और मिलीभगत का मामला है। अदालत ने कहा कि व्यावसायिक स्तर पर इतने बड़े आयोजन बिना स्थानीय प्रशासन के संरक्षण के नहीं हो सकते।

अदालती दखल के बाद रुकी पार्टी, मिले प्रतिबंधित ड्रग्स: 9 जून को हाईकोर्ट के वेकेशन बेंच के संज्ञान लेने के बाद पुलिस ने छापा मारा। जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार मौके से कोकीन और एलएसडी ड्रग्स के साथ दो पर्यटकों को गिरफ्तार किया गया। बिना परमिट के परोसी जा रही भारी मात्रा में शराब, बीयर की बोतलें, चरस/गांजा भरने के लिए इस्तेमाल होने वाले रोलिंग पेपर्स बरामद हुए। इस पार्टी में डीजे का काम कर रही रूस की डारिया कुजमिनिख की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुरुआती जांच में मौत की वजह ड्रग ओवरडोज मानी जा रही है। रात 10 बजे तक की अनुमति के बावजूद पार्टी में रात 11 बजे तक तेज संगीत बजाने का टाइम-टेबल तय किया गया था।