हिमाचल में मौसम का बड़ा अलर्ट: आज ओलावृष्टि-तूफान का कहर, 8 अप्रैल तक नहीं मिलेगी राहत!

Himachal Weather: हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है. राज्य में अगले एक सप्ताह तक बारिश से राहत मिलने के आसार नहीं हैं. मौसम विभाग ने आज और कल प्रदेश के 10 जिलों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि को लेकर चेतावनी जारी की है.

चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है.

तेज बारिश और बर्फबारी का डबल अटैक
मौसम विभाग के अनुसार, निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में तेज बारिश और ओलावृष्टि होने की संभावना है. वहीं लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में हिमपात के आसार हैं.

इसके साथ ही कई क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है.

8 अप्रैल तक खराब रहेगा मौसम
पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश में 8 अप्रैल तक लगातार मौसम खराब बना रहेगा.
-5 से 7 अप्रैल के बीच भले ही कोई विशेष चेतावनी नहीं है, लेकिन पूरे राज्य में बादल और बारिश का असर रहेगा.

-8 अप्रैल को वेस्टर्न डिस्टरबेंस और मजबूत होगा, जिससे फिर से तेज बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.

प्रशासन की एडवाइजरी: यात्रा से बचें
मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. विशेषकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा फिलहाल टालने को कहा गया है.

अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल क्षेत्र में हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है.

लाहौल-स्पीति की डीसी किरण भडाना के अनुसार, सुरंग के आसपास की पहाड़ियां, चंद्रा नदी का पुल और ढलान वाले क्षेत्र हिमस्खलन और मलबा गिरने के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं.

तापमान में आएगी गिरावट
लगातार बारिश और बर्फबारी के चलते प्रदेश में तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है.

अप्रैल में जहां आमतौर पर गर्मी बढ़ने लगती है, वहीं इस बार ऊंचे क्षेत्रों में ठंड का असर अभी भी बना हुआ है.

किसानों-बागवानों की बढ़ी चिंता
बदले मौसम ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है. इन दिनों प्रदेश में सेब की फ्लावरिंग का समय चल रहा है, जिसके लिए साफ मौसम बेहद जरूरी होता है.

लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.