हिमाचल प्रदेश में मानसून ने कहर बरपाना जारी रखा है. लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पूरे प्रदेश में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है. राज्य सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार फिलहाल 178 सड़कें बंद हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 56 सड़कें मंडी जिले में प्रभावित हैं.
मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में 75 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें 37 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं, जबकि बाकी मौतें भूस्खलन, बाढ़ और अन्य बारिश संबंधी घटनाओं में हुईं. किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर सभी जिलों में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया हुआ है.
बिजली और पानी की व्यवस्था चरमरा गई
भारी बारिश से बिजली और पेयजल व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. प्रदेश में 141 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. साथ ही 188 पेयजल योजनाएं प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर हो गई है.
करोड़ों का नुकसान, राहत कार्य तेज
30 जून से अब तक मानसून की बारिश ने प्रदेश को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है. सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां बारिश और भूस्खलन की चपेट में आई हैं. राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बहाली कार्यों में जुटा हुआ है.
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा, “प्रदेश में भारी बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ है. हम सभी प्रभावित परिवारों के साथ हैं. सड़कों को जल्द से जल्द खोलने और बिजली-पानी की बहाली के लिए पूरी टीम लगी हुई है.”
‘सावधान रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें’
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें. भूस्खलन वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. मानसून का यह कहर हिमाचल की पर्यटन गतिविधियों पर भी भारी पड़ रहा है. कई पर्यटक स्थल पहुंच मार्ग बंद होने से पर्यटक परेशान हैं. सरकार ने राहत कार्यों के साथ-साथ लंबे समय तक बंद रहने वाली सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने का निर्देश दिया है.