गर्मी के तेवर कड़े, मैदानों के साथ पहाड़ों में तेजी से बढ़ रहा पारा; 4 जिलों में लू चलने की चेतावनी

शिमला। जलवायु परिवर्जन का असर विश्व में पड़ रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में ही गर्मी के तेवर कड़े हो गए हैं। शुरूआत में ही लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। ये सब फरवरी माह में हिमपात और वर्षा का न होना और लगातार सूखे का प्रभाव है। बीते पांच वर्षों के आंकडों को देखा जाए तो इस बार गर्मी के तेवर कुछ ज्यादा ही कडे हो रहे हैं। मैदानों के साथ पहाडों में भी तापमान सामान्य से 5 से 12 डिग्री तक अधिक दर्ज किया जा रहा है।

हालांकि बीेत वर्षों के आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो मार्च माह के पहले सप्ताह के दौरान तीन से पांच डिग्री तक अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। यही नहीं ये बात भी सामने आई है कि कुछ-कुछ अंतराल पर वर्षा के कारण तापमान में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिलता था जो इस बार गर्मी के कड़े तेवर के तौर पर बिना वर्षा के देखा जा रहा है।

इन जिलों में लू चलने की चेतावनी
प्रदेश में रोहतांग, शिंकुला और बारालाचा में शनिवार को हल्का हिमपात हुआ। जबकि मनाली सहित कुछ एक स्थानों बादल छाए जिसके कारण अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आगामी तीन दिनों तक चार जिलों मंडी, कागड़ा, कूल्लू और सोलन में लू चलने की चेतावनी जारी की है।

शिमला सहित हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में मार्च के पहले सप्ताह में ही गर्मी के तेवर कडे देखने को मिल रहे हैं। मौसम के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अधिकतम तापमान कई स्थानों पर पिछले चार पांच वर्षों की तुलना में अधिक दर्ज किया गया है। विशेषज्ञ इसे बदलते मौसम पैटर्न और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मान रहे हैं।

राजधानी शिमला में इस वर्ष मार्च के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 14 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 6 से 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी साफ दिखाई देती है।

पिछले साल की तुलना इस बार तापमान अधिक
2025 में यह 14 से 21 डिग्री और 2023 में 15 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा था। कांगड़ा में इस वर्ष अधिकतम तापमान 25 से 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम 8 से 16 डिग्री सेल्सियस रहा। मंडी में भी अधिकतम तापमान 27 से 33 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।

मासम विज्ञान केंद्र शिमला के वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप कुमार ने बताया कि 9 से 14 मार्च तक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है और इसके कारण कहीं वर्षा और हिमपात की संभावना है। उन्हाकंने बताया कि इस बार बीते वर्षों की अपेक्षा मार्च में ज्यादा तापमान दर्ज किया जा रहा है। ये लगातार सूखे और तेज धूप के पड़ने के कारण देखने को मिल रहा है।