शिमला: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। बारिश, लैंडस्लाइड और बाढ़ से हर तरफ डर का माहौल है। हिमाचल की लगभग सभी नदियों ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में नदियों के रौद्र रूप को देखा जा सकता है। चंबा और कल्लू के दो वीडियो सबसे ज्यादा वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में नदियों के सैलाब के साथ पुष्मा स्टाइल में लकड़ियां बहकर आती हुई दिखाई दे रही हैं। अब इन वायरल वीडियो पर लोग सवाल उठा रहे हैं। वीडियो में कमेंट कर लोग पूछ रहे हैं कि इन लकड़ियों का मालिक कौन है? आइए हम आपको इन वीडियो को सच बताते हैं…
वायरल हो रहे वीडियो
दरअसल सोशल मीडिया पर ये वायरल हो रहे ये वीडियो कुछ दिनों पुराने है। कुल्लू का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है वो जून महीने का है। वहीं चंबा की रावी नदी का वीडियो एक हफ्ता पुराना है। इन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नदियों में पानी के बहाव के साथ लकड़ियों का ढेर आ रहा है। दरअसल कुल्लू जिले की बंजार और सैंज घाटी में 25 जून को फ्लैश फ्लड आया था। बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में लकड़ी बहती दिखी। मंडी के पंडोह डैम में तो लकड़कियों के ढेर दिखे और पूरा डैम लकड़ियों से भर गया था।
रावी नदी में दिखा ऐसा ही नजारा
चंबा का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर वायरल हो रहा है। ये वीडियो चंबा के शीतला पुल के पास का है। बता दें कि इस पुल के नीचे से रावी नदी गुजरती है। पुल के पास लकड़ियों का ढेर दिखाई दे रहा है। ये लकड़ियां किसकी है और कहां से आई ये सवाल सबके मन में है। वहीं लोग सरकार और प्रशासन पर भी सवाल उठा रहे हैं। वो पूछ रहे हैं कि ये पेड़ किसने और क्यों काटे।
लोग उठा रहे सवाल
सोशल मीडिया पर लोग इन वीडियो को शेयर कर रहे हैं। डॉक्टर शीतल नाम की यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि हिमाचल में आई इन बाढ़ों ने लकड़ी तस्करी के सबसे बड़े रैकेट का पर्दाफ़ाश कर दिया है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हिमाचल अपनी पूरी वनस्पति खो देगा और फिर हर साल प्राकृतिक आपदाएं आएंगी। हिमाचल सरकार को इसपर ठोस कदम उठाना चाहिए।
Nature is sending a warning… excessive wood logs in the Ravi River indicate active wood mafia operations in Himachal Pradesh.
Visuals from ravi river Chamba. pic.twitter.com/7x3CH0EU1G
— Go Himachal (@GoHimachal_) August 29, 2025