आप जहां भी काम करते हों, अगर ऐसे लोगों के करीब हैं जो आपको स्ट्रेस में रखते हैं या माहौल वैसा है तो यह आपको बूढ़ा बना सकता है. एक नई इंटरनेशनल स्टडी से पता चला है कि किसी के सोशल सर्कल में अगर लगातार तनाव देने वाले लोग बने हुए हैं तो वे चुपचाप बायोलॉजिकल एजिंग को तेज कर सकते हैं और हेल्थ पर असर डाल सकते हैं. ध्यान रहे कि ऐसे टेंशन देने वाले लोग घर में भी हो सकते हैं.
2600 से ज्यादा लोगों के सोशल नेटवर्क डेटा और बायोलॉजिकल सैंपल्स का विश्लेषण करने वाले रिसर्चर्स ने यह चौंकाने वाली जानकारी जुटाई है. कुछ लोगों ने बताया कि उनकी जिंदगी में ऐसे लोग हैं, जो अक्सर तनाव या इमोशनल स्ट्रेन पैदा करते हैं. ऐसे लोगों में तेजी से बायोलॉजिकल एजिंग के लक्षण दिखे. ये नतीजे पीयर-रिव्यूड जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PNAS) में पब्लिश हुए हैं.
सलाइवा से मापी गई एजिंग!
स्टडी में ऐसे लोगों को हसलर्स (परेशान करने वाला) बताया गया. ये लोग लगातार टेंशन या इमोशनल स्ट्रेन पैदा करते हैं. 10 में से तीन प्रतिभागियों ने बताया कि उनके सोशल नेटवर्क में कम से कम एक ऐसे व्यक्ति हैं. रिसर्चर्स ने सलाइवा सैंपल्स और DNA मिथाइलेशन पैटर्न का इस्तेमाल कर बायोलॉजिकल एजिंग को मापा. इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि शरीर सेलुलर लेवल (कोशिकीय स्तर) पर कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है.
एक ही उम्र, पर 9 महीने बूढ़े
विश्लेषण में पाया गया कि हर एक्स्ट्रा स्ट्रेसफुल रिश्ता लगभग 1.5% तेजी से बायोलॉजिकल एजिंग से जुड़ा था. औसतन, ऐसे रिश्तों की रिपोर्ट करने वाले लोग, उसी उम्र के उन लोगों से बायोलॉजिकली लगभग नौ महीने बड़े पाए गए जिन्होंने इसकी रिपोर्ट नहीं की. स्टडी के मुख्य लेखक ब्युंगक्यू ली ने सावधान रहने, उन लोगों से बचने की सलाह दी है जो लगातार निगेटिविटी और स्ट्रेस फैलाते हैं. उन्होंने सलाह दी है कि ऐसे लोगों से खुद को दूर कर लें. हालांकि यह फैसला आसान नहीं है.
हां, कई मामलों में ‘परेशान करने वाले’ रिश्तों को पूरी तरह से खत्म करना प्रैक्टिकल नहीं हो सकता है, खासकर जब उनमें परिवार या ऐसे रिश्तेदार शामिल हों जो कुछ पॉजिटिव पहलू भी लाते हों.
टीओआई की रिपोर्ट, चेन्नई के एक डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन ने कहा कि लगातार स्ट्रेस शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स को बढ़ाता है, जो क्रोमोसोम के सिरों पर प्रोटेक्टिव कैप को छोटा कर सकता है. इससे सेल्स की उम्र बढ़ने की गति तेज हो जाती है. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक स्ट्रेस के दौरान कोर्टिसोल, एपिनेफ्रीन और नॉरपेनेफ्रीन जैसे स्ट्रेस हार्मोन भी बढ़े हुए रहते हैं, जिससे सूजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड वेसल को नुकसान होता है.
स्ट्रेस से नुकसान क्या?
AIIMS दिल्ली में साइकेट्री के प्रोफेसर डॉ. राजेश सागर ने कहा कि जब स्ट्रेस वाले रिश्ते बार-बार दिमाग के फाइट रिस्पॉन्स को एक्टिवेट करते हैं तो शरीर लंबे समय तक अलर्ट रहता है. जिन लोगों के रिश्ते ज्यादा स्ट्रेस वाले थे, उन्होंने खराब फिजिकल हेल्थ, ज्यादा एंग्जायटी और डिप्रेशन लेवल, ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स भी बताया. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार इमोशनल स्ट्रेस से सिरदर्द, पाचन की समस्या, नींद में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ये इस बात के संकेत होते हैं कि शरीर स्ट्रेस से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है.