Hantavirus news: आजकल हंतावायरस का खौफ चल रहा है. समुद्री जहाज एमवी होंडियस पर सवार कुछ लोगों में संदिग्ध तौर पर हंतावायरस का एंडीज स्ट्रेन पाया गया है, जो एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है. इसलिए इसकी चर्चा चारों ओर रही है. हंतावायरस संक्रमण एक दुर्लभ लेकिन संभावित रूप से गंभीर बीमारी है. इस वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से फैलता है. कुछ मरीजों में यह बीमारी बहुत तेजी से गंभीर रूप ले सकती है, हालांकि राहत की बात ये है कि हर संक्रमित व्यक्ति में हालत गंभीर होने के लक्षण विकसित नहीं होते.
संक्रमण घातक होने की टाइमलाइन
संक्रमण की शुरुआत अक्सर सामान्य तरीके से होती है और लक्षण संपर्क में आने के एक से आठ हफ्तों के भीतर कभी भी दिखाई दे सकते हैं. अधिकतर मामलों में लोगों में दो से तीन हफ्तों के अंदर लक्षण उभरने लगते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, हंतावायरस का एंडीज स्ट्रेन मैन टू मैन कंटेमिनेट होता है यानी एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है, हालांकि ऐसा रेयर ऑफ द रेयरेस्ट यानी बहुत कम मामलों में होता है.
संक्रमण से किन परिस्थितियों में जान जा सकती है?
हालांकि डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि कुछ मरीजों की हालत कुछ ही घंटों में अचानक बिगड़ सकती है. सांस लेने में दिक्कत, लो ब्लड प्रेशर और फेफड़ों में पानी भरने जैसी समस्याएं तेजी से डेवलप हो सकती हैं. यही स्थिति जानलेवा कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम में बदल सकती है. इस चरण में समय पर इलाज बेहद जरूरी हो जाता है.
हंतावायरस संक्रमण की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत गंभीर नहीं लगते. ज्यादातर मरीजों को शुरुआत में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, थकान और पेट संबंधी परेशानी महसूस होती है. ये सभी लक्षण तीन से छह दिनों तक बने रह सकते हैं, जिसके बाद गंभीर जटिलताएं सामने आने लगती हैं. मामला बिगड़ने लगता है.
शुरुआती वायरल जैसे लक्षणों के बाद बीमारी अचानक खतरनाक रूप ले सकती है. गंभीर मामलों में मरीज को सांस फूलना, सीने में जकड़न, दिल की धड़कन तेज होना और ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
इस वायरस से बीमार हुए मरीज की हालत वायरस के स्ट्रेन पर निर्भर करती है. हल्के स्ट्रेन के केस में भी कुछ मरीजों में गंभीर फेफड़ों की समस्या हो सकती है. हालांकि Sin Nombre और Andes virus जैसे आक्रामक स्ट्रेन में लगभग 60-80% मरीज गंभीर कार्डियोपल्मोनरी बीमारी की ओर बढ़ सकते हैं. ऐसे में हालत बिगड़ने पर मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट में रखने या फिर वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है. डॉक्टर ऐसे मरीजों की लगातार निगरानी करते हैं क्योंकि स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ सकती है.
किडनी पर भी पड़ सकता है असर
हंतावायरस केवल फेफड़ों में ही नहीं, बल्कि किडनी पर भी असर डाल सकता है. यूरोप और एशिया में पाए जाने वाले वायरस स्ट्रेन में किडनी संबंधी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं. इसके लक्षणों में पेशाब कम होना, शरीर में सूजन या किडनी फंक्शन टेस्ट में गड़बड़ी शामिल हो सकती है. ऐसे गंभीर मामलों में मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है.
सबसे पहले आपको घबराना नहीं है… क्या करना है जानिए
अमेरिका से लेकर यूरोप तक के डॉक्टरों का कहना है कि हंतावायरस से इन्फेक्टेड होने के शुरुआती चरण में संक्रमित व्यक्ति को सामान्य वायरल बुखार जैसी समस्या हो सकती है. इसके मरीजों को थकान, बुखार, शरीर दर्द, सिरदर्द, मतली और पेट में असहजता जैसी समस्याएं होती हैं. क्योंकि ये लक्षण फ्लू या मौसमी संक्रमण जैसे होते हैं, इसलिए कई लोगों को अंदाजा नहीं होता कि बीमारी खतरनाक रूप ले सकती है.
ऐसे लक्षण रहे तो सतर्क रहना है. फौरन योग्य डॉक्टरों को दिखाना है. डॉक्टर कहें तो खून या शरीर की जांच करानी है. इसके साथ ही एक और सबसे जरूरी बात कि वो सभी लोग जिनका हाल-फिलहाल चूहों वाले इलाकों, खराब वेंटिलेशन वाली जगहों, गोदामों, खेतों या बंद इमारतों में जाना हुआ हो, उन्हें असामान्य बुखार या सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
भारत के लिए हंतावायरस कितना चिंताजनक?
भारत के डॉक्टर्स हंतावायरस की पड़ताल में जुटे हैं. हंतावायरस मामलों की खबरों के बीच ICMR-NIV और AIIMS के विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत में फिलहाल महामारी या बड़े संक्रमण का कोई खतरा नहीं है.