Biggest Cause of Autism in Children: जैसे एक सनकी प्रेमी का गुस्सा जंगलों को राख कर देता है. वैसे ही हमारी एक लापरवाही बच्चों के कोमल भविष्य को स्वाहा कर सकती है. अमेरिका में जोनाथन ने तो आग लगाई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी गलती बच्चे के दिमाग में ऑटिज्म का जहर घोल सकती है? हम बात कर रहे हैं मोबाइल की. देश के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक एम्स यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की एक ताजा रिसर्च हर परिवार के लिए चिंता बढ़ाने वाली है.
इस उम्र के बच्चों में ऑटिज्म का ज्यादा खतरा
एम्स दिल्ली के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी की अगुवाई में हुई यह स्टडी बताती है कि जो बच्चे एक साल की उम्र से पहले ज्यादा मोबाइल देखते हैं. उनमें 3 साल की उम्र तक ऑटिज्म के लक्षण दिखने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
यह डिजिटल गुलामी का वह दौर है, जहां माता-पिता की जरा सी लापरवाही बच्चे के मानसिक विकास को हमेशा के लिए रोक सकती है. अक्सर जब बच्चा रोता है या खाना नहीं खाता, तो हम उसके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं. हमें लगता है कि बच्चा शांत हो गया. लेकिन असल में उस वक्त उसके कोमल दिमाग पर हमला हो रहा होता है.
दुनिया से कटने लग जाता है बच्चा
दिल्ली एम्स में बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी की रिसर्च के मुताबिक, जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए. इस उम्र में बच्चा जो देखता और सुनता है. वही उसके दिमाग के तार जोड़ता है. अगर वह सिर्फ स्क्रीन देखेगा तो वह असल दुनिया से कटना शुरू हो जाएगा.
सीडीसी यानी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के 2025 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अब दुनिया में हर 31 में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार हो रहा है. भारत में भी यह आंकड़ा डराने वाला है. जहां करीब 20 लाख लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं.
भारत में 20 लाख से ज्यादा मरीज
दुनियाभर में ऑटिज्म की दर तेजी से बढ़ी है और आंकड़ों के मुताबिक अब हर 31 में से 1 बच्चा इसकी चपेट में है. भारत में भी हालात चिंताजनक हैं. जहां ऑटिज्म के मरीजों की संख्या 20 लाख के पार पहुंच चुकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि 18 महीने तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम बिल्कुल शून्य होना चाहिए.
18 महीने से 6 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए भी इसे ज्यादा से ज्यादा 1 घंटा ही सीमित रखना जरूरी है. अगर बच्चा रोजाना 4 घंटे से ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताता है तो उसमें ऑटिज्म जैसे लक्षण पैदा होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है.