भारत में क्यों पीते हैं दूध वाली चाय? अंग्रेजों का है इसमें बड़ा हाथ, जानें ये दिलचस्प कहानी…

Tea Culture India: भारत के लिए चाय केवल एक ड्रिंक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा बन चुकी है. चाहे सुबह हो या शाम, हर घर में दूध वाली चाय बनाई जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी शुरुआत कब हुई? भारत में दुध वाली चाय पीना कब शुरू हुआ. इस खबर में हम आपको इसका जवाब देंगे.

ब्रिटिशों ने सिखाई चाय पीने की आदत
आपको बता दें, ताय भारत की नहीं है. बल्कि इसे 19वीं सदी में अंग्रेज लाए थे. शुरुआत में भारत में चाय की खेती सिर्फ ब्रिटेन में भेजने के लिए ही होती थी. लेकिन 1900 के दशकों में अंग्रेजों ने भारत में ही चाय बनाना शुरू कर दिया था. उन्होंने लोगों दूध और चीनी मिलाकर चाय पीने की आदत डाली, जिससे चाय का स्वाद बढ़ा और लोगों में इसकी बिक्री बढ़ गई. धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैल गई.

भारतीय संस्कृति का हिस्सा है दूध
दूध भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा है. इसे केवल डाइट में शामिल नहीं करते, बल्कि यह पोषण और पवित्रता का भी प्रतीक है. भारत में इस पूजा-पाठ में भी इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद में दूध को बेहद फायदेमंद माना जाता है. ऐसे में जब चाय में दूध मिलाया जाता है, तो वो ज्यादा टेस्टी और पोष्टिक बन जाता है. इस वजह से दूध वाली चाय लोगों को ज्यादा पंसद बन जाती है.

मसाला चाय ज्यादा फायदेमंद
आपको बता दें, भारत में चाय में जब अदरक, इलायची, लौंग, दालचीनी जैसे मसाले मिलाए जाते हैं, इससे इसका स्वाद और चाय का निखार बढ़ जाता है. चाय का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ ये सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. अदरक डाइजेशन में मदद करता है, इलायची सांसों को ताजा करती है और दूध प्रोटीन से भरपूर होती है.