नीमच: मालवा के दो जिलों में जीबीएस यानी गुलियन बेरी सिंड्रोम का कहर देखने को मिल रहा है. नीमच में जहां 2 बच्चों की मौत हो चुकी है. वहीं, 17 मरीज अब तक मिल चुके हैं. जबकि, मंदसौर जिले के गरोठ और सुवासरा क्षेत्र में भी इस बीमारी के दो मरीज सामने आए हैं. जिसके बाद आसपास के जिलों में स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है.
क्या बोले विशेषज्ञ और अधिकारी
दुर्लभ किस्म की यह बीमारी गुलियन बेरी सिंड्रोम की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग स्थानीय जिला प्रशासन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की टीम के सदस्य भी जुटे हुए हैं. मंदसौर और नीमच दोनों जिलों में इससे पूर्व भी इस बीमारी के मरीज मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार संक्रमण की रफ्तार पूर्व के वर्षों से अधिक है. खासकर नीमच के मनासा से ही सर्वाधिक मरीज मिले हैं. जिनमें अधिकांश की उम्र 4 से 17 वर्ष बताई जा रही है. आईए एक्सप्लेनर के जरिए जानते हैं कि कितना खतरनाक है जीबीएस और क्यों इन जिलों में इसका कहर देखने को मिल रहा है.
गुलियन बेरी सिंड्रोम पर विशेषज्ञों की राय
रतलाम जिला अस्पताल के संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव बोरीवाल ने बताया कि “यह बीमारी बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण से हो सकती है. हालांकि इस बीमारी के होने का कारण अज्ञात है, लेकिन आप प्रदूषित पानी पीने, बासी या बैक्टीरिया लगा भोजन लेने, दूषित मांस या अंडा खाने से भी इस बीमारी का संक्रमण होने की संभावना रहती है.
इस रहस्यमय बीमारी में मरीज की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है, पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन के लक्षण दिखाई देते हैं. मरीज का बैलेंस नहीं बन पाता है. जिससे वह खड़ा नहीं हो सकता है. यह पैरों से शुरू होकर शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैलता है. इसमें मरीज का श्वसन तंत्र भी प्रभावित होता है. इसके उच्चतम स्तर पर लकवा होने और मौत होने की भी संभावना होती है.
कैसे करें बचाव,बीमारी होने पर क्या करें
डॉ गौरव बोरीवाल ने बताया कि इस बीमारी से बचने के लिए घर में अतिरिक्त हाइजीन मेंटेन करना चाहिए. साफ और उबला हुआ पानी पीना चाहिए. हालांकि अन्य संक्रामक बीमारियों की तरह यह छूने से या मरीज के संपर्क में आ जाने से नहीं फैलती है, लेकिन दूषित खाना, दूषित मांस और अंडा खाने से भी बचना चाहिए. यदि इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में दिखाना चाहिए. प्रारंभिक स्थिति में उपचार मिल जाने से यह बीमारी ठीक भी हो जाती है लेकिन लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है.”
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की क्या है तैयारी
नीमच के मनासा, मंदसौर के सुवासरा गरोठ क्षेत्र में भी जीबीएस के संदिग्ध मरीज मिलने के बाद आसपास के जिलों में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. नीमच जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सहित मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रभावित क्षेत्र मनासा में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. वहीं, डोर टू डोर घरों का सर्वे कर इस बीमारी के लक्षण से प्रभावित मरीजों को ढूंढा जा रहा है. प्रभावित क्षेत्र से पानी के सैंपल भी लिए जा रहे हैं.
GBS के लक्षण
नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने बताया कि “जिले के प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम घर-घर सर्वे कर रही है. बुखार और डायरिया के मरीजों को भी डॉक्टर के ऑब्जर्वेशन में रख कर देखा जा रहा है कि जीबीएस के सिम्टम्स तो उन मरीजों में नहीं है. जिला अस्पताल में भी उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है. इम्यून बूस्ट इंजेक्शन की भी व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में की गई है.
GBS से बचाव के उपाए
वहीं, मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ने पर अस्पतालों में व्यवस्था की गई है.” नीमच जिला अस्पताल के सीएमएचओ डॉक्टर आरके खाघौत ने बताया कि “स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के साथ इस बीमारी की जड़ का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, आसपास के क्षेत्र में भी सावधानी बरतने के साथ ही प्रभावित परिवारों को पेयजल उबालकर पीने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है.”
मंदसौर और नीमच में ही क्यों मिल रहे मरीज
बताते चलें कि पांच माह पूर्व मंदसौर जिले के मुल्तानपुरा में भी 6 मरीज सामने आए थे. वहीं, पीछे पिछले दो-तीन सालों में भी मंदसौर और नीमच जिले में कुछ मरीज जीबीएस के लक्षणों वाले सामने आए थे. इसके बाद नीमच का मनासा सुर्खियों में तब आया, जब यहां एक के बाद एक कई मरीज जीबीएस बीमारी के मिलने लगे. दो छोटे बच्चों की तो इस बीमारी की वजह से मौत भी हो गई. नीमच के आधिकारिक आंकड़ों में अब तक 17 मरीज मिलने की पुष्टि की गई है.
वहीं, मंदसौर जिले में दो-दो संदिग्ध मरीज मिलने की जानकारी मिली है. इसके बाद अब स्वास्थ्य विभाग और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की टीम इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर मंदसौर और नीमच में ही क्यों इस रहस्यमय बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं. बहरहाल नीमच और मंदसौर में रहस्यमय बीमारी के मरीज सामने आ जाने के बाद रतलाम में भी स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है.
गुलियन बेरी सिंड्रोम को लेकर अलर्ट
हालांकि यहां अब तक इस बीमारी का कोई मरीज सामने नहीं आया है. संभाग आयुक्त आशीष सिंह द्वारा नीमच सहित अन्य जिलों में भी सावधानी बरतने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं.