सावधान मध्य प्रदेश! 4 दिन तक नहीं थमेगी बारिश, कई जिलों को लेकर जारी किया अलर्ट

भोपाल: मध्य प्रदेश में कुछ दिनों की सुस्ती के बाद मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश में एक साथ कई मौसम प्रणालियां सक्रिय होने से अगले चार दिनों तक तेज बारिश और कई इलाकों में भारी से अति भारी वर्षा होने की संभावना है। मौसम विभाग ने सोमवार को उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम और कई जगहों पर तेज बारिश होने का अनुमान है।

कई मौसम प्रणालियां बनीं भारी बारिश की वजह
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश से गुजर रही मानसून ट्रफ, सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) और डिप्रेशन के साथ जल्द सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ बारिश की गतिविधियों को और मजबूत करेगा। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से 27 से 30 जुलाई के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है।

इन जिलों में बारिश का ज्यादा असर रहेगा
मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कई जिलों में लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

सामान्य से अब भी कम है बारिश
मानसून सक्रिय होने के बावजूद प्रदेश में अब तक कुल बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। अभी तक औसतन 13.2 इंच (334.9 मिमी) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस समय तक 15.5 इंच (395.2 मिमी) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।

41 जिले अब भी बारिश के घाटे में

प्रदेश के केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, जबकि 41 जिले अभी भी वर्षा की कमी से जूझ रहे हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश में निवाड़ी ऐसा जिला है, जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, सीहोर, राजगढ़, देवास, हरदा, नीमच, मंदसौर और कुछ अन्य जिलों में भी बारिश का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

जुलाई का लक्ष्य अब भी अधूरा

मौसम विभाग का कहना है कि जून में मानसून कमजोर रहा था। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन बीच में कई दिनों तक बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने से कुल वर्षा का आंकड़ा फिर सामान्य से नीचे चला गया। प्रदेश की सालाना सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है, जिसमें जुलाई का सबसे बड़ा योगदान रहता है। ऐसे में अगले चार दिनों तक होने वाली बारिश से मानसून के मौजूदा घाटे को काफी हद तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।