शिवपुरी/हैदराबाद: मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही कई जिलों में खाद की किल्लत देखने को मिल रही है. यूरिया और डीएपी के लिए किसानों को घंटो इंतजार के बावजूद पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के हालात भी देखे जा रहे हैं. हालांकि केन्द्र और राज्य सरकार पर्याप्त खाद होने का दावा कर रही हैं.
किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर खाद उपलब्ध न होने के कारण उन्हें निजी दुकानों से अधिक दामों पर खाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. शिवपुरी में प्रशासन ने कृषि विभाग के साथ मिलकर खाद की कालाबाजारी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है. 70 बोरी डीएपी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया है.
कई जिलों में यूरिया और डीएपी का संकट
खरीफ सीजन में प्रदेश के कई जिलों में यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों का संकट देखने को मिल रहा है. हाल ही में सीहोर, गुना, बैतूल, आगर-मालवा, टीकमगढ़ और रीवा-सतना जैसे जिलों में खाद की किल्लत और किसानों के प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं. छतरपुर, गुना, सिंगरौली, रीवा और नीमच में भी किसानों को यूरिया और डीएपी के लिए कई घंटों तो कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है. किसानों का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें जितनी खाद चाहिए उतनी नहीं मिल रही है.
खाद को लेकर कई शहरों में विरोध प्रदर्शन
छतरपुर की बात करें तो यहां कृषि विभाग के अनुसार मांग के मुकाबले केवल 21.66% खाद की आपूर्ति होने से किसानों को परेशानी हो रही है. जिसके कारण ई-टोकन व्यवस्था में भी दिक्कतें आ रही हैं. सिंगरौली और नीमच में डीएपी की जगह महंगा एनपीके खाद लेने का दबाव बनाए जाने पर किसानों ने हाईटेंशन टॉवर पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया था. ऐसा ही मामला गुना और रीवा में देखने को मिला है जब खाद नहीं मिलने के कारण किसानों ने चक्काजाम कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया था.
ई-टोकन और स्लॉट बुकिंग में समस्या
किसानों का आरोप है कि खाद वितरण केंद्रों पर लागू की गई नई ऑनलाइन ई-टोकन और स्लॉट बुकिंग व्यवस्था मुसीबत बन गई है. तकनीकी जानकारी के अभाव और सर्वर डाउन होने के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई जिलों में किसानों को 40-50 किलोमीटर दूर से पैदल और साइकिलों से खाद केंद्रों तक आना पड़ रहा है, जहां उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही है.
कालाबाजारी का आरोप
किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध न होने के कारण किसानों को निजी दुकानों से अधिक दामों पर खाद खरीदने या जबरन अन्य अनावश्यक मंहगी खाद या दूसरे उत्पाद खरीदने को मजबूर किया जा रहा है. इधर सरकार और कृषि विभाग का दावा है कि राज्य में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और वितरण क्षमता बढ़ाई जा रही है, परंतु जमीनी स्तर पर इसका लाभ किसानों तक समय पर नहीं पहुंच रहा है. राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके अलावा सस्ते खाद के साथ महंगा खाद थोपने वालों पर भी कार्रवाई की बात कही है.
शिवपुरी में 70 बोरी डीएपी जब्त
प्रशासन और पुलिस ने कृषि विभाग के साथ मिलकर खाद की कालाबाजारी के खिलाफ शिवपुरी में बड़ी कार्रवाई की है. तेंदुआ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम लेवा में संयुक्त टीम ने दबिश देकर 70 बोरी डीएपी उर्वरक से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया है. कार्रवाई के दौरान पुलिस को देखते ही ट्रैक्टर चालक रिंकू धाकड़ और उसका एक अज्ञात साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले.
जांच के दौरान नहीं मिले कोई कागजात
23 जून की रात करीब 1 बजे ग्राम लेवा में रिंकू धाकड़ के घर के सामने खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से 70 बोरी डीएपी बरामद की गई. जांच के दौरान मौके पर उर्वरक के परिवहन, खरीद या बिक्री से संबंधित कोई भी वैध बिल, चालान या दस्तावेज नहीं मिले. कृषि विभाग की टीम ने खाद की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की जांच के लिए उर्वरक के सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेज दिए हैं.
पुलिस ने दर्ज किया मामला
तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया, “वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक कल्लू कोली की शिकायत पर तेंदुआ थाना पुलिस ने रिंकू धाकड़ और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ अवैध परिवहन, कालाबाजारी और धोखाधड़ी की आशंका के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस फरार आरोपियों की तलाश और मामले की विस्तृत विवेचना में जुट गई है. खाद की वैधता की अंतिम पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद होगी.