Electricity Prices In Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में मई का महीना जनता के लिए दोहरी मुसीबत लेकर आया है. एक तरफ झुलसा देने वाली गर्मी है, तो दूसरी तरफ बिजली के भारी-भरकम बिल. राज्य सरकार और बिजली कंपनियों ने महज एक महीने के अंदर ही दूसरी बार बिजली की दरें बढ़ा दी हैं. मई 2026 से पूरे राज्य में 5.36 प्रतिशत का एक नया FPPAS (ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार) लागू किया जा रहा है. इसके चलते बिजली के बिलों में बढ़ोतरी तय है, जिससे लोगों के लिए कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर चलाना काफी महंगा हो जाएगा.
मध्यप्रदेश में फिर महंगी हुई बिजली
MP Power Management Company Limited के अनुसार वास्तविक और अनुमानित लागतों के बीच एक बड़ा अंतर सामने आने के बाद एक सरचार्ज जोड़ा गया. 2026 में बिजली खरीद की लागत ₹3.97 प्रति यूनिट थी, जबकि अनुमान ₹3.66 प्रति यूनिट था. ₹0.32 प्रति यूनिट के इस अंतर ने बिजली कंपनियों के खर्चों को बढ़ा दिया.
आम आदमी को लगा झटका
इस फैसले से राज्य में लाखों घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा. कंपनियों का तर्क है कि बिजली उत्पादन और खरीद की बढ़ती लागत के कारण सरचार्ज लगाना जरूरी हो गया था. यह सरचार्ज बिजली के बिलों में जोड़ा जाएगा, जिससे मध्यम-वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ना तय है. लगातार दो महीनों तक लागू की गई इस बढ़ोतरी ने बिजली की दरों को अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है.
30 दिन में दूसरा झटका
मई 2026 से एक नया FPPAS (ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार) 5.36 प्रतिशत लागू किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में सीधे तौर पर वृद्धि होगी. इससे पहले अप्रैल में टैरिफ शुल्कों में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि पहले ही लागू की जा चुकी थी. बिजली खरीदने की बढ़ती लागत के कारण उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ गया है. इससे घरेलू और औद्योगिक, दोनों तरह के उपभोक्ता प्रभावित होंगे.