थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों को चढ़ा दिया HIV+ खून, 5 महीने बाद जागी सरकार, ज्वॉइंट टास्क फोर्स का गठन

सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। थैलेसीमिया से जूझ रहे छह मासूम बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान HIV संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस घटना के पांच महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन उस गुनहगार डोनर को नहीं ढूंढ पाया है, जिसकी एक लापरवाही ने इन बच्चों की जिंदगी दांव पर लगा दी।

टास्क फोर्स के जिम्मे जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने अब एक जॉइंट टास्क फोर्स का गठन किया है। सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला की अगुवाई वाली इस टीम में जिला अस्पताल, ब्लड बैंक, स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और एफडीए के अफसरों को शामिल किया गया है। यह टीम न केवल डोनर की तलाश करेगी, बल्कि ब्लड बैंक के पूरे सिस्टम की खामियों को भी खंगालेगी।

फर्जी नंबर और दलालों का जाल
जांच में अब तक जो सामने आया है, वो डराने वाला है। अधिकारियों के मुताबिक ब्लड बैंक के रजिस्टर में दर्ज आधे से ज्यादा डोनर्स का कोई अता-पता नहीं है। जो नंबर दिए गए थे, उनमें से कई गलत या बंद निकले। पिछले साल दिसंबर में हुए एक खुलासे में पता चला था कि ब्लड बैंक में बिचौलिए सक्रिय हैं, जो पैसों के लालच में किसी भी रिप्लेसमेंट डोनर का खून बिना जांचे चढ़वा देते थे।

यह सिर्फ एक मेडिकल चूक नहीं, बल्कि समाज के लिए बड़ा खतरा है। अगर उस संक्रमित डोनर का पता नहीं चला, तो वह अनजाने में और भी कई लोगों की जान खतरे में डाल सकता है। हम रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
डॉ. मनोज शुक्ला, सीएमएचओ (जांच टीम प्रमुख)

क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सभी डोनर्स की पहचान कर उनका टेस्ट नहीं किया गया, तो यह एक बड़े हेल्थ क्राइसिस का रूप ले सकता है। नई टास्क फोर्स अब आर्थिक रिकॉर्ड और टाइमलाइन की दोबारा जांच करेगी ताकि उन डोनर्स तक पहुंचा जा सके जिन्होंने सिस्टम की आंखों में धूल झोंकी।