Digvijay Singh: एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में बड़े फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं, उन्होंने इस मामले में राज्य के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं राजेंद्र शुक्ला को पत्र भी लिखा है. दरअसल, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाएं देने के लिए के अनुबंधित साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर यह आरोप लगे हैं. कहा जा रहा है कि अस्पतालों में मरीजों की जांचों को ऊंची दरों पर करने और मरीजों के नाम पर ही फर्जीवाड़ा करते हुए करोड़ों रुपए का घपला किया जा रहा है. दिग्विजय सिंह ने इस मामले में सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
दिग्विजय सिंह के आरोप
दिग्विजय सिंह का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में जांच के नाम पर साइंस हाउस ने यह फर्जीवाड़ा किया है. इसलिए साइंस हाउस कंपनी के पिछले 5 साल के सभी भुगतान और जांच रिपोर्ट की ऑडिट कराई जानी चाहिए, इसके अलावा अस्पताल की रिकॉर्ड और कंपनी के पेश किए डाटा का मिलन हो. उनका कहना है कि जब कंपनी को टेंडर मिला था, तभी से यह प्रक्रिया चल रही है. पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के टेंडर लेने के लिए जो प्रस्ताव आए थे उनमें साइंस हाउस कंपनी के साथ-साथ प्रतिद्वंद्वी एल-2 कंपनी दूसरे नंबर पर थी. लेकिन जब ठेका साइंस हाउस को मिला तो फिर एल-2 कंपनी न्यूबर्ग का विलय भी साइंस हाउस में हो गया था. जिसके बाद दोनों कंपनियों ने पार्टनरशिप में काम शुरू किया था, दिग्विजय सिंह का कहना है कि केवल टेंडर में प्रतियोगिता दिखाने के लिए यह कंपनी बनी थी. लेकिन इस तरह से राज्य सरकार के खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया है.
बता दें कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में हब एंड स्पोक मॉडल दिए जाने के लिए 25 मई 2021 को एक टेंडर जारी हुआ था. जिसमें लैबों में जांच की नई दरें शामिल थी. खास बात यह है कि कई सरकारी लैब के पास एनएबीएल सर्टिफिकेट भई नहीं था, यही वजह है कि आरोप लग रहा है कि यहां सबकी मिलीभगत से बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है. इस मामले में स्वास्थ्य विभाग पर 150 से 200 करोड़ रुपए तक देने की बात सामने आई है.
बता दें कि कुछ दिन पहले ही भोपाल में आयकर विभाग की टीम की तरफ से साइंस हाउस के ठिकाने पर छापेमार कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया है. वहीं अब दिग्विजय सिंह के पत्र के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है.