मध्य प्रदेश में विधायक निधि के खर्च पर ऑनलाइन नजर, सॉफ्टवेयर से होगी हर विधानसभा क्षेत्र की मॉनिटरिंग

भोपाल। लोकसभा क्षेत्र स्थानीय विकास निधि की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (विधायक निधि) की ऑनलाइन निगरानी की तैयारी है। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग इसके लिए राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से विशेष सॉफ्टवेयर विकसित करवा रहा है। इस व्यवस्था से विधायक और संबंधित विभाग यह आसानी से जान सकेंगे कि निधि की कितनी राशि खर्च हो चुकी है और कितनी अभी शेष है। फिलहाल राज्य स्तर पर ऐसी कोई केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली मौजूद नहीं है।

2030-31 तक जारी रहेगी योजना
प्रदेश सरकार ने हाल ही में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना को वित्तीय वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। इस अवधि में योजना पर करीब 2,875 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं विधायक इस निधि की वार्षिक राशि को वर्तमान ढाई करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की मांग लगातार उठा रहे हैं। इसे लेकर अन्य राज्यों के प्रावधानों का अध्ययन भी कराया जा चुका है और बजट सत्र में इस संबंध में कोई अहम घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।

विधायक निधि और वेतन-भत्तों पर मंथन
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के निर्देश पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को विधायक निधि और विधायकों के वेतन-भत्तों से जुड़े मामलों पर विचार करने के लिए अधिकृत किया है। वर्तमान व्यवस्था में यह पता लगाने का कोई ठोस सिस्टम नहीं है कि विधायकों को मिलने वाली निधि का कितना उपयोग हुआ है और किस क्षेत्र में विकास कार्यों की क्या स्थिति है।

जिला स्तर पर सिमटी रिपोर्टिंग
दरअसल, विधायकों की अनुशंसा पर स्वीकृत विकास कार्य जिला स्तर पर ही मंजूर हो जाते हैं और उनकी रिपोर्टिंग राज्य स्तर तक नहीं पहुंच पाती। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लगभग दस महीने बीत जाने के बावजूद विभाग के पास यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि किस जिले में कितनी राशि खर्च हुई और कहां कितनी बची हुई है।

नए सॉफ्टवेयर से मिलेगी पूरी तस्वीर
इसी कमी को दूर करने के लिए अब राज्य स्तर से निगरानी की व्यवस्था विकसित की जा रही है। नए सॉफ्टवेयर के जरिए विधानसभा क्षेत्रवार यह जानकारी उपलब्ध होगी कि कहां कितनी विधायक निधि खर्च हुई है और कितनी राशि शेष है। सरकार की योजना है कि नए वित्तीय वर्ष से यह प्रणाली पूरी तरह लागू कर दी जाए।

गाइडलाइन में भी होगा बदलाव
विधायकों को अपने क्षेत्र में छोटे और मध्यम विकास कार्य कराने के लिए बार-बार सरकार के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए स्थानीय क्षेत्र विकास निधि की गाइडलाइन को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इसमें समय-समय पर विधायकों द्वारा दिए गए सुझावों को शामिल किया जाएगा, ताकि योजना ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक बन सके।