मुरैना. मध्य प्रदेश के चंबल इलाके से अपराध का एक चौंकाने वाला नया ट्रेंड सामने आया है, जहां अब इंसानों की तरह भैंसों का ‘अपहरण’ कर फिरौती वसूली जा रही है. मुरैना और राजस्थान बॉर्डर से लगे इलाकों में सक्रिय गिरोह पशुपालकों को निशाना बना रहे हैं. तबेलों और गांवों से भैंस चोरी कर बदमाश सीधे संपर्क करते हैं और रकम देने पर ही उन्हें लौटाते हैं. इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. पशु पालकों का कहना है कि अपहरण करने वाले मोटी रकम लेकर पशु वापस करते हैं और फिरौती नहीं देने पर वे पशु को कहीं और बेच देते हैं.
यह पूरा मामला सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध के रूप में उभर रहा है. आरोप है कि बदमाशों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि बिचौलियों के जरिए वसूली की जा रही है और पुलिस को सूचना देने पर धमकियां दी जाती हैं. हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में लोग खुद जंगलों में डेरा डालकर अपनी भैंसों की तलाश कर रहे हैं. इस घटनाक्रम ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद अपराधियों पर शिकंजा कसने में देरी पर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की नाक के नीचे यह नेटवर्क सक्रिय है.
चंबल में ‘भैंस किडनैपिंग’ का नया ट्रेंड
चंबल के बीहड़ इलाकों में अपराध का यह नया तरीका तेजी से फैल रहा है. पहले जहां अपहरण और फिरौती के मामले इंसानों तक सीमित थे, अब भैंसों को निशाना बनाया जा रहा है. बदमाश रात के समय तबेलों से भैंस खोलकर ले जाते हैं. पशुपालकों के अनुसार भैंस चोरी होने के बाद कुछ ही समय में कॉल या संदेश आता है. इसमें तय रकम देने पर भैंस लौटाने की बात कही जाती है. कई मामलों में 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की मांग की जाती है. अगर यह रकम नहीं दी जाए तो बदमाश पशु को कहीं और बेच देते हैं.
बॉर्डर पार ले जाते हैं पशु
ग्रामीणों का कहना है कि चोरी के बाद भैंसों को तुरंत मध्य प्रदेश से राजस्थान के बीहड़ इलाकों में पहुंचा दिया जाता है. इससे पुलिस की कार्रवाई मुश्किल हो जाती है. सीमा पार होने के कारण ट्रैक करना और भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है. इस पूरे खेल में बिचौलियों की भूमिका अहम बताई जा रही है. ये लोग दोनों पक्षों के बीच समझौता कराते हैं और रकम तय करवाते हैं. आरोप है कि इसी नेटवर्क के जरिए करोड़ों की कमाई की जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि बिचौलियों के बताने पर बदमाश भैंसों की चोरी कर लेते हैं. यही बिचौलिए ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हैं कि वे उनकी भैंस वापस ला देंगे, लेकिन रकम देनी पड़ेगी.
ग्रामीणों में डर, खुद कर रहे तलाश
मध्य प्रदेश पुलिस से निराश ग्रामीण अब खुद ही भैंसों की तलाश में जुटे हैं. कई लोग जंगलों में हथियार लेकर डेरा डाल रहे हैं. उनका कहना है कि शिकायत करने पर भी ठोस कार्रवाई नहीं होती, उल्टा धमकियां मिलने लगती हैं. ग्रामीण बताते हैं कि सरायछौला क्षेत्र के रामनिवास की भैंस चोरी हो गई थी. उसकी तलाश करते हुए वे राजस्थान के एक गांव पहुंचे. वहां बिचौलियों के जरिए 15 हजार रुपये देकर भैंस वापस मिली. मृगपुरा क्षेत्र के नारायण सिंह परमार की भैंस भी चोरी हुई थी. बदमाश उसे राजस्थान ले गए थे. संपर्क करने पर 20 हजार रुपये मांगे गए. रकम देने के बाद भैंस वापस मिली.