भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि पत्नी का गुस्सा उसे निराधार आरोप लगाकर अपने पति की छवि खराब करने का अधिकार नहीं देता। इसी के साथ कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया। कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें न्यायिक अलगाव तो दिया गया था, लेकिन तलाक नहीं।
न्यायमूर्ति विशाल धगत और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने कहा; “यह स्थापित है कि पत्नी पति के अवैध संबंधों के बारे में बहुत गंभीर आरोप लगा रही थी। हालांकि साबित करने में पूरी तरह विफल रही है। हम मानते हैं कि यदि आरोप सत्य थे, तो पत्नी को अपने द्वारा बार-बार किए जा रहे दावों को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए थी, या हम यह कह सकते हैं कि इन गंभीर आरोपों को साबित करने का भार उस पर ही था।
अदालत ने कहा कि निचली अदालत का यह मानना सही था कि पत्नी का अपने पति के प्रति व्यवहार क्रूर था, खासकर तब जब वह आरोप लगाने के बाद उन आरोपों को साबित नहीं कर पाई।
इस कपल की शादी 2002 में हुई थी, लेकिन 2019 से वे अलग रह रहे थे। पति द्वारा दायर तलाक की याचिका के अनुसार, पत्नी अपने बच्चे की उपेक्षा करती थी और ससुराल वालों साथ भी गलत व्यवहार करती थी। उसने घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12 के तहत पति के खिलाफ मुकदमा भी चलाया था। दूसरी ओर, पत्नी ने दावा किया कि उसे ससुराल में प्रवेश नहीं दिया गया और उसके पति के अन्य महिलाओं के साथ अवैध संबंध थे।