3560 करोड़ का नुकसान, सैकड़ों लोगों की जान; CM सुक्खू ने पूरे हिमाचल को आपदाग्रस्त घोषित किया

शिमला: मॉनसून और बारिश से हुई तबाही के चलते पूरे हिमाचल प्रदेश को ‘आपदाग्रस्त’ घोषित कर दिया गया है। राज्य में बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से 3,560 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। वहीं, मॉनसून के मौसम में अब तक 326 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 171 मौतें भूस्खलन, बाढ़, बारिश, बादल फटने, डूबने, बिजली का करंट लगने और अन्य आपदाओं जैसी घटनाओं में हुई हैं।

हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा को बताया कि पूरे हिमाचल प्रदेश को ‘आपदाग्रस्त’ घोषित कर दिया गया है और राहत एवं बचाव कार्य जोर-शोर से जारी हैं। सुक्खू ने सदन में अपनी ओर से दिए एक बयान में कहा कि चंबा जिले में मणिमहेश यात्रा के रास्ते में फंसे 15,000 तीर्थयात्रियों में से 10,000 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया और हालात पर नजर रखी जा रही है।

बाढ़ और भूस्खलन से 3,560 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान
मुख्यमंत्री ने कहा, “बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से 3,560 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। सबसे ज्यादा नुकसान सड़कों, पुलों, पानी और बिजली आपूर्ति प्रणालियों को हुआ है। मैंने (आपदा प्रभावित इलाकों का) हवाई सर्वे किया है।”

सुक्खू ने बताया कि चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग व चंबा-सलूनी-पादरी-जोत मार्ग का 25 किलोमीटर लंबा हिस्सा खोल दिया गया है और जम्मू व श्रीनगर से आए मणिमहेश यात्रियों को इसी रास्ते से भेजा जा रहा है। सुक्खू ने यह भी बताया कि वह चंबा जिला प्रशासन के साथ राहत एवं बचाव कार्यों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कामों की जानकारी देते हुए कहा कि कुल्लू-मंडी नेशनल हाईवे को खोलने का काम जारी है, जबकि सड़कों पर फंसे किसानों के फल और सब्जियों को कुल्लू की ओर से भेजा जा रहा है।

अधिकतर जगहों पर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई
सीएएम ने बताया कि ज्यादातर जगहों पर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है, पूरे कुल्लू जिले में दूरसंचार संपर्क स्थापित कर दिए गए हैं जबकि आदिवासी जिले लाहौल-स्पीति में मोबाइल नेटवर्क बहाल किया जा रहा है।

सुक्खू ने यह भी बताया कि भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने केलांग में राशन गिराया जबकि एक बच्चे व एक गर्भवती महिला सहित पांच मरीजों को इलाज के लिए हवाई मार्ग से ले जाया गया। उन्होंने बताया कि लाहौल-रोहतांग-मनाली मार्ग खोल दिया गया है और प्रभावित लोगों को पका हुआ भोजन, सूखा राशन, कंबल और ‘स्लीपिंग बैग’ वितरित किए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि सभी मणिमहेश तीर्थयात्री सुरक्षित हैं लेकिन अखबारों में मौतों का दावा किया गया है।

उन्होंने सुक्खू से मणिमहेश यात्रा के दौरान हुई मौतों की संख्या बताने को कहा। ठाकुर ने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पहले दावा किया था कि 3,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन मुख्यमंत्री ने 15,000 तीर्थयात्रियों में से 10,000 का आंकड़ा दिया। भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि कौन सा आंकड़ा सही है और चंबा में वास्तविक स्थिति क्या है। ठाकुर ने दावा किया, “आज भी लगभग 500 तीर्थयात्री (पैदल नहीं चल सकते) भरमौर में फंसे हुए हैं।”

उन्होंने सरकार से सड़कों को जोड़ने, प्रभावित लोगों को राशन उपलब्ध कराने और क्षेत्र में बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने का आग्रह किया।

सुक्खू ने स्पष्ट किया कि कुगती से चार अन्य लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जिसके बाद 15 अगस्त से शुरू हुई मणिमहेश यात्रा में अब तक मरने वालों की संख्या 16 हो गई है। उन्होंने बताया कि शवों को वापस लाने के लिए 20 कुलियों की व्यवस्था की गई है। कुगती एक गांव है, जो मणिमहेश यात्रा के शुरुआती बिंदु हडसर और मणिमहेश झील के बीच 8,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

सुक्खू ने आपदा प्रभावित राज्य के लिए 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार का आभार व्यक्त किया।

मॉनसून के दौरान मरने वालों की संख्या बढ़कर 326 हुई

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने बताया है कि हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के इस मौसम में अब तक 326 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 171 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटने, डूबने, बिजली का करंट लगने और अन्य आपदाओं जैसी बारिश से संबंधित घटनाओं में और 155 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं।

20 जून से 1 सितंबर तक, राज्य में भारी नुकसान दर्ज किया गया है: सार्वजनिक और निजी संपत्ति, फसलों, बुनियादी ढांचे और पशुधन को 3,15,804.98 लाख रुपये (3,158 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। मृतकों में 385 लोग घायल, 1,304 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त और 41 दुकानें/कारखाने नष्ट भी शामिल हैं। कुल 27,653 पोल्ट्री और 1,898 अन्य जानवरों की मौत हो चुकी है।

मंडी जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में सबसे अधिक मौतें (29 मौतें) दर्ज की गईं, उसके बाद कांगड़ा (30), चंबा (14), कुल्लू (15) और शिमला (17) का स्थान रहा। सड़क दुर्घटनाएं चंबा और मंडी (22-22), कांगड़ा (19), किन्नौर (14) और शिमला (16) में सबसे ज्यादा घातक रहीं।