डूबती नाव, देर से मिली जैकेट… जबलपुर हादसे के बाद गुस्सा-गम और सिस्टम पर बड़े सवाल

जबलपुर : मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे देश को झकझोरकर रख दिया है. एक तरफ कई परिवारों के घर उजड़ गए, तो दूसरी तरफ सामने आए वीडियो ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि जब नाव डूबने लगी, तब अफरा-तफरी के बीच यात्रियों को लाइफ जैकेट बांटी जा रही थी. यानी सुरक्षा इंतजाम पहले से नहीं, बल्कि आखिरी पलों में किए गए. लेकिन बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या नाव में सवार यात्रियों की संख्या तय सीमा से ज्यादा थी? क्या सभी के लिए पहले से लाइफ जैकेट मौजूद थीं? और अगर थीं, तो उन्हें पहले क्यों नहीं पहनाया गया?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मौसम अचानक खराब हुआ और तेज हवा के चलते नाव असंतुलित हो गई. हादसे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई. कुछ लोग इसे सीधी-सीधी प्रशासनिक नाकामी बता रहे हैं, तो कुछ इसे सिस्टम की उदासीनता का नतीजा मान रहे हैं. ‘जब नाव डूब रही थी, तब जैकेट बांटने का क्या मतलब?’ यह सवाल अब हर तरफ गूंज रहा है. वहीं, पीड़ित परिवारों में गम और आक्रोश दोनों साफ नजर आ रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन होता, तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं.

जबलपुर हादसे पर पूरे देश में आक्रोश
इस दौरान घबराए लोग इधर-उधर भाग रहे थे, कोई अपने बच्चों को सीने से लगाए मदद के लिए पुकार रहा था, तो कोई तैरकर किनारे तक पहुंचने की कोशिश में जुटा था. हादसे से तुरंत पहले के इस वीडियो में दिख रही अफरा-तफरी सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की गवाही देती है. सवाल उठता है क्या सुरक्षा के इंतजाम पहले से नहीं होने चाहिए थे? क्या लाइफ जैकेट समय पर नहीं दी जा सकती थीं? और सबसे बड़ा सवाल, आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा? इस हादसे के बाद पूरे देश में आक्रोश है. सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं. पीड़ित परिवारों का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है. किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई, तो किसी का पूरा संसार ही उजड़ गया.

यूपी में इंजीनियर बना था सिस्टम की लापरवाही का शिकार
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. अगर अब भी नहीं चेते, तो ऐसी त्रासदियां बार-बार दोहराई जाएंगी. इसके पहले भी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा हम उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 16-17 जनवरी 2026 की रात को देख चुके थे जब एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत बिल्डर की लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा बनी थी. बिना बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड वाले गहरे निर्माण गड्ढे में कार गिरने और 90 मिनट तक रेस्क्यू में देरी के कारण दम घुटने से उनकी मौत हो गई थी. उस दिन अगर युवराज को समय पर सुरक्षा मिल गई होती तो शायद वो आज जिंदा होते. गड्ढे में गिरने के बाद 45 मिनट तक वो मदद के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन लापरवाह सिस्टम और तमाशबीन भीड़ से निकलकर कोई उन्हें बचाने नहीं गया.

कैसे हुआ था हादसा?
जबलपुर में गुरुवार की शाम नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के पास मौसम ने पल भर में ऐसा रुख बदला कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला. तेज आंधी और उफनती लहरों के बीच एक नाव पलट गई और पानी के बीच मची चीख-पुकार और अफरा-तफरी ने पूरे इलाके को दहला दिया. राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन हालात आसान नहीं थे. अंधेरा बढ़ रहा था और मौसम अब भी खतरनाक बना हुआ था. शुक्रवार को जब तलाशी अभियान आगे बढ़ाया गया, तो डूबी नाव से पांच और शव निकाले गए. इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई. अभी भी करीब छह लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. 28 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.