सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक चौंकाने वाली प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. कुसमी जनपद के गोतरा ग्राम पंचायत की आदिवासी महिला रुकमन को समग्र आईडी में मृत घोषित कर दिया गया है. एक वर्ष से अधिक समय से यह महिला ‘जिंदा भूत’ बनी घूम रही है. सरकारी योजनाओं के तहत खाद्यान्न सहायता न मिलने के कारण परेशान रुकमन ने जिला कलेक्टर से जनसुनवाई में गुहार लगाई. कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पंचायत कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
रोते-रोते कलेक्टर से ये कहा…
रुकमन, जो वनांचल क्षेत्र के गोतरा गांव की निवासी हैं, ने बताया कि उनकी समग्र आईडी में गलती से मौत दर्ज हो गई. इसके चलते उन्हें पेंशन, राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं मिल रहीं. पंचायत कर्मी अब उनसे जिंदा होने का सबूत मांग रहे हैं, जिससे महिला को दर-दर भटकना पड़ रहा है. “साहब, मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मर चुकी हूं. खाद्यान्न तक नहीं मिलता, परिवार भूखा मर रहा है,” रुकमन ने आंसुओं के बीच कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई.
दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
कलेक्टर ने तत्काल जांच टीम गठित की है. उन्होंने कहा, “ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दोषी कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई होगी और रुकमन की आईडी सुधारकर सभी लाभ तुरंत बहाल किए जाएंगे.” ग्राम पंचायत गोतरा में यह घटना स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा रही है. पंचायत सचिव ने प्रारंभिक जांच में डेटा एंट्री त्रुटि का हवाला दिया, लेकिन रुकमन के परिवार ने इसे जानबूझकर की साजिश बताया.
यह घटना मध्य प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस की कमियों को रेखांकित करती है. समग्र आईडी सिस्टम, जो गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया, उल्टे परेशानी का कारण बन रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने की जरूरत है. रुकमन का केस अन्य प्रभावितों के लिए मिसाल बनेगा. जिला प्रशासन ने वादा किया है कि जल्द ही न्याय मिलेगा.