मध्य प्रदेश में इलाज के नाम पर हैवानियत, तांत्रिक के बहकावे में तीन नवजातों को गर्म लोहे से दागा

झाबुआ: मध्य प्रदेश के झाबुआ और गुजरात के दाहोद जिले में तीन बच्चों के साथ इलाज के नाम पर अमानवीयता का मामला सामने आया है। इलाज के दौरान डॉक्टरों को बच्चों के शरीर पर जलने के गहरे निशान मिले, इसके बाद इस घटना का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि गुजरात के दाहोद जिले के गांव के तांत्रिक के कहने पर बच्चों को गर्म सरियों और सुई से दागकर इलाज करने का प्रयास किया गया। इसमें दो बच्चे महज दो-दो महीने के हैं।

मामले में पता चला कि परवट गांव निवासी दो महीने के संदीप को 15 सितंबर, गोपालपुरा निवासी दो माह के डेनियल को 20 सितंबर और अंबाखोदरा निवासी दो साल की पार्वती को 23 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक जांच में डॉक्टरों ने पाया कि पार्वती के गर्दन और पेट पर गर्म लकड़ी या लोहे की छड़ों से जलने के निशान थे, जबकि अन्य दो बच्चों के शरीर पर भी गंभीर जलने के दाग थे। फिलहाल सभी बच्चे ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं और सुरक्षित हैं।

पुलिस ऐक्शन झाबुआ एडिशनल एसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया ने बताया कि जिला चिकित्सालय से प्राप्त सूचना के आधार पर कोतवाली झाबुआ में गंभीर प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोप है कि गुजरात के ग्राम जालद के तांत्रिक जयश सोलंकी ने बच्चों के शरीर पर चार स्थानों पर गर्म सुई से दाग किया। घटना की रिपोर्ट जीरो पर दर्ज कर सभी दस्तावेज पुलिस अधीक्षक दाहोद, गुजरात को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजे गए हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएस बघेल ने बताया कि संदीप, डेनियल और पार्वती का इलाज झाबुआ जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा है। बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार मॉनीटर की जा रही है और स्वस्थ होने पर उन्हें शीघ्र ही डिस्चार्ज किया जाएगा।

बच्चों के परिजनों का क्या कहना दो महीने के डेनियल के पिता सागर ने बताया कि उनके बच्चे की तबीयत वड़ोदरा में खराब हुई थी। वे दाहोद में उसका इलाज कराने गए थे, जहां उन्हें किसी ने इस तरह के इलाज की सलाह दी। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इन बच्चों को अलग-अलग जगहों पर किसने और कहां दागा।

अंधविश्वास में आकर मासूमों से हैवानियत डॉ. बघेल ने चेतावनी दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे अंधविश्वास और तांत्रिक इलाज की घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य अमले और जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चों को अलग-अलग जगहों पर किसने और कहां दागा। झाबुआ में 2023 में भी इस प्रकार की एक घटना सामने आई थी, जिस पर मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई की थी।