भोपाल: मध्य प्रदेश में पिछले चार सालों में नेशनल हाईवे पर टोल कलेक्शन दोगुना हो गया है, लेकिन गड्ढों के कारण होने वाली मौतों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। यह चौंकाने वाला आंकड़ा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जारी किया है। 2020-21 में जहां एमपी में नेशनल हाईवे पर 2,178.19 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले गए थे, वहीं इसी साल गड्ढों के कारण 96 लोगों की जान गई थी।
2024-25 में क्या हैं आंकड़े
2024-25 में टोल कलेक्शन बढ़कर 4,188.15 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन गड्ढों से मरने वालों की संख्या तीन गुना होकर 277 पहुंच गई। इसका मतलब है कि एमपी में हर दूसरे दिन नेशनल हाईवे के गड्ढे एक जान ले रहे हैं, जबकि हर दो दिन में करीब 23 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा रहे हैं। यह चिंताजनक स्थिति तब है जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुद नवंबर 2022 में एमपी के मंडला दौरे पर हाईवे की खराब गुणवत्ता पर नाराजगी जताई थी और अधिकारियों को काम ठीक कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों के आंकड़ों में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। 2020 से 2024 के बीच पूरे भारत में गड्ढों के कारण 9,438 मौतें हुईं, जिनमें से 969 मौतें अकेले मध्य प्रदेश में हुईं। इस मामले में एमपी देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है, जहां इसी अवधि में 5,127 लोगों की जान गई।
12 फरवरी को दिया था आंकड़ा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 12 फरवरी को लोकसभा में लिखित जवाब में नेशनल हाईवे पर गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं, मौतों और चोटों का डेटा साझा किया था। वहीं, 11 फरवरी को राज्यसभा में उन्होंने टोल कलेक्शन का आंकड़ा बताया था।
9300 किलोमीटर से अधिक नेशनल हाईवे
मध्य प्रदेश में 9,300 किलोमीटर से अधिक नेशनल हाईवे हैं। राज्य की सड़क घनत्व राष्ट्रीय औसत से कम है। जहां देश में प्रति 100 वर्ग किलोमीटर पर 201.28 किलोमीटर सड़कें हैं, वहीं एमपी में यह आंकड़ा 162.20 किलोमीटर है। हालांकि, सरकार ने एमपी के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें से 75,000 करोड़ रुपये के काम पूरे हो चुके हैं और 65,000 करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं। करीब 2,500 किलोमीटर की परियोजनाओं के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट अभी तैयार किए जा रहे हैं।