Uma Bharti: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उमा भारती की सक्रियता ने हलचल मचा दी है. भोपाल के अयोध्या नगर स्थित दशहरा मैदान में 29 अक्टूबर 2025 को गौ संवर्धन संकल्प सभा’ आयोजित हुई, जिसे एक ‘शक्ति पूजा’ के रूप में देखा जा रहा है. इससे मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है. भाजपा और विपक्ष दोनों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. साध्वी उमा भारती ने इस मंच से सत्ता समीकरणों को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है.
उमा भारती ने अपने पुनरुत्थान के लिए ‘गौ संवर्धन’ और ‘गंगा की निर्मलता’ के मुद्दों को चुना, जो न सिर्फ हिंदुत्व की कोर विचारधारा को छूते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों से भी जोड़ते हैं. उन्होंने साफ किया कि राम का काम तभी पूरा होगा जब गाय और गंगा सुरक्षित हों. सभा में लोधी समाज के हजारों लोगों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि उमा भारती अब सिर्फ एक संत या प्रचारक नहीं, बल्कि पिछड़े वर्गों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक बनकर उभर रही हैं.
झांसी से 2029 चुनाव की मंशा
इस सभा का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत उमा भारती का 2029 में झांसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताना था. उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार में रहकर काम करना ज्यादा प्रभावी होता है, जो स्पष्ट करता है कि वह अब केवल अभियान की संचालिका बनकर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि नीति निर्माण में निर्णायक भूमिका चाहती हैं.
भाजपा के लिए आंतरिक चुनौती
इस आयोजन ने भाजपा के अंदरूनी खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है. कुछ मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक रूप से सभा को समर्थन देना दर्शाता है कि उमा भारती के पास आज भी पार्टी के भीतर एक मजबूत राजनीतिक आधार है. उनका ‘सेल्फी वाली राजनीति’ पर तंज छोटे नेताओं के लिए सीधा संदेश था कि संगठन में अनुभव और योगदान को नजरअंदाज करना उन्हें स्वीकार्य नहीं होगा.
महिलाओ को साधने की कोशिश
उमा भारती ने अपने भाषण में महिला और ग्रामीण वोटबैंक को साधने के लिए कई आक्रामक सुझाव दि. उन्होंने महिलाओं से ‘काली’ बनकर शराब दुकानों के खिलाफ खड़ा होने की अपील की, जिससे शराबबंदी की अपनी पुरानी लड़ाई को एक तीखा राजनीतिक आयाम दिया. उन्होंने ‘लाड़ली बहनों’ को एक-एक गाय देने और शहरों में गाय पालने की अनुमति देने जैसे सुझाव देकर महिला और ग्रामीण मतदाताओं को सीधे साधने की कोशिश की.
उमा भारती की यह ‘शक्ति पूजा’ महज एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति पुनर्स्थापना का उद्घोष है. वह एक बार फिर खुद को ‘फायर ब्रांड’ हिंदुत्व चेहरा के रूप में स्थापित कर रही हैं, जो राम, गाय, गंगा और जनसरोकारों को एक सशक्त वैचारिक मंच दे सकती हैं.