पत्नी भी दे सकेगी तलाक.. ‘अवैध बच्चा’ शब्द खत्म, MP UCC Draft में लिव-इन और शादी पर नए नियम, जानिए क्या बदला

भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी आ गई है. सरकार आज विशेष कैबिनेट बैठक में यूसीसी के ड्राफ्ट को मंजूरी के लिए रखेगी. प्रस्तावित ड्राफ्ट में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और बच्चों के अधिकारों से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं.

ड्राफ्ट के अनुसार अब ‘अवैध संतान’ शब्द समाप्त कर दिया जाएगा. विवाह से बाहर जन्मे बच्चों के साथ-साथ सरोगेसी और एआरटी (टेस्ट ट्यूब बेबी) से जन्मे बच्चों को भी समान कानूनी दर्जा और अधिकार मिलेंगे. वहीं, यदि पति विवाह के दौरान किसी दूसरी महिला को गर्भवती कर देता है तो पत्नी को विवाह समाप्त करने का कानूनी अधिकार मिलेगा.

UCC ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाने का प्रस्ताव है. साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान रखा गया है. साथ ही, रिश्ता टूटने की स्थिति में महिला साथी को पत्नी की तरह भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा.

यदि पति विवाह के दौरान किसी दूसरी महिला को गर्भवती कर देता है, तो पत्नी को तलाक करने का अधिकार होगा. पहले यह अधिकार मुख्य रूप से पति के पक्ष में माना जाता था.

विवाह और तलाक के लिए नियम
सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह मान्य होगा. बहुविवाह पर रोक लगेगी.

शादी और तलाक, दोनों का पंजीयन कराना जरूरी होगा.

रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर भी शादी वैध रहेगी.

रजिस्ट्रार आवेदन खारिज करेगा तो लिखित वजह देनी होगी. और उसके खिलाफ अपील का अधिकार रहेगा.

मौखिक तलाक, सामाजिक पंचायत या गैर-कानूनी तरीकों से विवाह खत्म नहीं होगा.
तलाकशुदा दंपती विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी किसी प्रक्रिया के लिए बाध्य नहीं होंगे. ऐसा दबाव डालना अपराध माना जाएगा.

लिव-इन रिलेशनशिप के नियम
साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा.
नोटिस के बाद भी जानकारी न देने पर 6 महीने तक जेल और ₹25,000 तक जुर्माना.
लिव-इन के लिए दोनों की न्यूनतम आयु 18 साल होगी.
रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना हो सकता है.
गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने पर 3 महीने तक जेल और ₹25,000 तक जुर्माना.
रिश्ता टूटने पर महिला साथी को पत्नी की तरह भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का अधिकार मिलेगा.
यदि किसी की उम्र 21 साल से कम है तो उसके माता-पिता या संरक्षक को सूचना दी जाएगी.
रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा.