शिकायत के बाद व्हाट्सएप के जरिए दिया तीन तलाक, मुजफ्फरनगर में आरोपी पर दर्ज हुआ केस

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों पर दहेज के लिए अपनी पत्नी को कथित तौर पर परेशान करने और बाद में वॉट्सऐप के जरिए तीन तलाक देने का मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना सोमवार को बसेरा गांव में हुई। महिला आसमा ने अपने पति हसन, सास रशीदा और दो देवरों सलीम एवं शाकिर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद यह कार्रवाई की गई। मामले में सीओ रविशंकर ने कहा कि रविवार को दहेज निषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की संबंधित धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

पीड़िता की शिकायत पर केस
पीड़िता की शिकायत के अनुसार, उसकी शादी नवंबर 2017 में हसन से हुई थी। उसने आरोप लगाया कि शादी के तुरंत बाद उसे लगातार दहेज की मांग और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इस स्थिति को सहन न कर पाने के कारण वह अपने पति का घर छोड़कर अपने माता-पिता के साथ रहने लगी। 31 मार्च 2025 को हसन ने कथित तौर पर उसे एक वॉट्सऐप संदेश भेजा, जिसमें तीन तलाक कहा गया था। यह भारतीय कानून के तहत अवैध है। उसकी शिकायत पुलिस तक पहुंचने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और आगे की जांच जारी है।

महिला ने की आत्महत्या
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इससे पहले मई महीने में ससुराल वालों की ओर से दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित की जा रही एक महिला ने अपने पति के फोन कॉल के बाद आत्महत्या कर ली। पति ने उसे ‘तीन तलाक’ दे दिया था। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद दहेज उत्पीड़न की शिकायत पर मामला दर्ज न करने के लिए एक सब-इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया। इस मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए गए। पीड़िता ने महाराष्ट्र में रहने वाले अपने पति के फोन कॉल में तीन तलाक कहे जाने के बाद अपने कमरे में फांसी लगा ली।

क्या कहता है तीन तलाक कानून?
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत एक बार में तीन तलाक, जिसे तलाक-ए-बिद्दत भी कहा जाता है। इसको 2019 में असंवैधानिक घोषित कर भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत, किसी भी रूप में चाहे वह मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक विधि हो, एक बार में तीन तलाक देना एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए तीन साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। यह कानून मुस्लिम महिलाओं को मनमाने तलाक प्रथाओं से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था।