मुजफ्फरनगर के एक गांव में 50-60 रोहिंग्या परिवार होने का दावा-मचा हडकंप

पश्चिमी उतर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में गुरुवार (8 जनवरी 2026) की सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब योग साधना केंद्र बघरा के संस्थापक स्वामी यशवीर महाराज की एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गई. पोस्ट में तितावी थाना क्षेत्र के गांव खेड़ी दूधाधारी में कथित तौर पर बांग्लादेशी रोहिंग्या मुसलमानों के अवैध रूप से रहने का दावा किया गया था. दावा किया गया कि करीब 50 से 60 परिवार सरकारी जमीन पर कब्जा कर पहचान छुपाकर रह रहे हैं.

वहीं सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद जब पुलिस तक पहुंची तो पुलिस और प्रशासन की टीम भी हरकत में आ गई. प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर मौके पर जांच शुरू की. सूचना मिलते ही मीडिया भी गांव पहुंची और पूरे प्रकरण की पड़ताल की गई.

बीएलओ ने बताई पूरी हकीकत
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को एक अलग ही दिशा दे दी. गांव के पूर्व प्रधान और क्षेत्रीय बीएलओ के अनुसार, जिन लोगों को बांग्लादेशी रोहिंग्या बताया जा रहा था, वे वास्तव में प्रजापति समाज के हिंदू परिवार हैं. ये परिवार करीब 10 से 12 साल पहले शामली जनपद से रोजगार की तलाश में यहां आए थे और फिलहाल कोल्हू व ईंट-भट्टों पर मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं.

मामले पर ग्रामीणों ने क्या कहा?
वहीं इस मामले को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि इन परिवारों की झोपड़ियों में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और धार्मिक चित्र मौजूद हैं. बीएलओ के मुताबिक, सभी परिवारों के पास आधार कार्ड, पहचान पत्र, वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम और एसआईआर से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं.

पूर्व प्रधान पक्ष का आरोप है कि आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए वर्तमान प्रधान द्वारा इसे चुनावी मुद्दा बनाकर इन परिवारों के वोट कटवाने की कोशिश की जा रही है. वहीं, वर्तमान प्रधान ने आरोपों को निराधार बताया है.

पुलिस ने शुरू की मामले की तफ्तीश
फिलहाल पुलिस और जिला प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है. प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी.